अमेरिका में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से नस्लवाद का मुद्दा काफी छाया हुआ है। इसकी आंच भारतीय क्रिकेट तक पहुंच गई है। वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान डैरेन सैमी ने सनराइजर्स हैदराबाद के कैंप में नस्लवाद होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेलने के दौरान टीम के साथी खिलाड़ी उन्हें ‘कालू’ कहकर बुलाते थे। तब उन्हें इसका मतलब पता नहीं था। अब पता चला है। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है।
इसके बाद इशांत शर्मा की एक 6 साल पुरानी इंस्टाग्राम पोस्ट वायरल होने लगी। इसमें उन्होंने सैमी को कालू लिखा था। अब टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने एक ऐसा ट्वीट कर दिया है, जो काफी वायरल हो रहा है। लोग उस पर तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। बहुत से लोग इरफान पठान से पूछ रहे हैं कि कश्मीरी पंडितों के साथ यही होता है। कश्मीर में हजारों पंडितों का जबरन स्थानांतरण कराया गया। उनकी हत्या कर दी गई और बहू-बेटियों के साथ रेप किया गया। कुछ लोग हलाला को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
दरअसल, इरफान पठान ने मंगलवार शाम को ट्वीट किया। इसमें उन्होंने इशारों-इशारों में सोसाइटी में मुसलमानों को घर नहीं देने को भी नस्लवाद बताया। पठान ने लिखा, ‘नस्लवाद सिर्फ आपकी त्वचा के रंग तक सीमित नहीं है। यदि आपका विश्वास अलग है और उसकी वजह से सोसाइटी में घर नहीं मिलता, तो वह भी एक तरह का नस्लवाद है।’
इरफान पठान ने यह ट्वीट किया था। इस पर लोग उन्हें इस तरह से ट्रोल कर रहे हैं।
Racism is not restricted to the colour of the skin.Not allowing to buy a home in a society just because u have a different faith is a part of racism too… #convenient #racism
— Irfan Pathan (@IrfanPathan) June 9, 2020
काश आप औरतो की भी फिक्र करते, तीन तलाक पे कभी कुछ न कहा आपने,हलाला के खिलाफ तो जरूर आवाज उठाई होगी,नही?मर्दो के एक से ज्यादा निकाह पे तो कुछ गलत जरूर नज़र आया होगा, है ना भाईजान? बुरखे की कैद से तो औरतो को छुटकारा दिलाने की जरूर सोची होगी
नो वैट
Btw आपकी वाइफ को कभी देखा नही हमने— Who-am-i (@Whoami27864522) June 9, 2020
Jamia और JNU के Students के लिए दर्द महसूस कर रहे थे पठान जी,जरा कश्मीरी पंडित अजय जी की मौत पर भी कुछ बोलो।एकतरफा सोच रखना भी Racism ही कहलाता है भारतीय क्रिकेटर,आपके जैसे लोग कभी देश के लिए खेले और हमने आपको दिल से प्यार किया उसका बहुत पछ्तावा है।
— Vivek Kumar (@vivek656kumar) June 9, 2020
That the difference between educated and ueducated one legend zaheer khan never played victim card not even used his religion for sympathy that why zeheer khan is best fast bowler we have on the other hand some people who got so much love from us defame us for attention….
— mohan kayastha (@akhsayfan2222) June 9, 2020
Then Muffims are racist of extreme level, only this kom starts k£iling of people for being of different faith.
— Manpu (@ipunamchoudhary) June 9, 2020
And in muslim countries when a person belonging to other faith is forced to fast and not allowed to eat or drink publicly even that qualifies as racism.
— Umesh choubey advocate (@Umesh60691759) June 9, 2020
And Halal Industry is certified racism. Discrimination on basis of religion is barbaric practice must be abolished.
— प्रथमेश (@Prathm_N) June 9, 2020
In Kerala Hindus are not allowed to sell their homes to other Hindus. In some of the places, ultimatum given to Hindus that Hindus can’t even do pooja.
Religious beliefs are supporting to kill Kafirs and ultimately the accused/culprits are conveniently playing victim card
— Kamesh_Krish (@Kamesh68881680) June 9, 2020
इरफान ने सोमवार को भी घरेलू क्रिकेट में नस्लवाद होने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने सैमी मामले पर कहा था, ‘मुझे नहीं पता कि उनके साथ साथ नस्लवाद कब हुआ, लेकिन घरेलू क्रिकेट में ऐसा होता है। मैं 2014 में हैदराबाद की टीम में सैमी के साथ कैंप का हिस्सा था। हो सकता है कि ऐसा सच में हुआ हो, लेकिन मुझे ऐसे किसी भी घटना की जानकारी नहीं है, क्योंकि इस पर बड़े पैमाने पर चर्चा नहीं हुई होगी। हां, घरेलू क्रिकेट में खासकर दक्षिण भारतीय क्रिकेटरों को अक्सर उत्तर और पश्चिमी क्षेत्रों में खेलते हुए नस्लीय टिप्पणी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, मैं किसी का नाम नहीं लूंगा।’

