जहां कभी लड़कियों के लिए मैदान में उतरना भी गुनाह समझा जाता था, वहीं से निकलकर प्रवीण कुमारी आज गोलपोस्ट के सामने दीवार बनकर खड़ी हैं। हिमाचल के एक छोटे से गांव में जन्मीं प्रवीण कुमारी ने सामाजिक बंदिशों, संसाधनों की कमी और हालात की मार के बावजूद अपने सपनों को मरने नहीं दिया। यह लड़की आज हिमाचल की गोलकीपर है और उन सैकड़ों लड़कियों की उम्मीद भी, जिनके सपनों पर कभी गांव की सोच पहरा देती थी।

अपने जज्बे से समाज की सोच बदल रहीं प्रवीण कुमारी

गांव की बंदिशों से लड़ते हुए गोलपोस्ट तक पहुंचने का सफर प्रवीण कुमारी के लिए कभी आसान नहीं रहा। ईंट-सीमेंट ढोने वाले पिता की बेटी प्रवीण कुमारी ने शुरुआत में लड़कों के साथ अभ्यास किया और फिर अपनी जैसी लड़कियों की एक पूरी टीम तैयार की। हिमाचल प्रदेश की गोलकीपर के रूप में पहचान बना चुकीं 26 साल की प्रवीण अपने जज्बे से खेल के साथ-साथ सोच भी बदल रही हैं।

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दीव में घोघला बीच पर खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 में प्रवीण कुमारी के कभी हार न मानने वाले रवैये (पैर में गंभीर चोट लगने के बावजूद) ने हिमाचल प्रदेश को महिला बीच सॉकर मैच में मेजबान दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव (DNH&DD) के खिलाफ जीत हासिल करने में मदद की।

हिमाचल प्रदेश में ऊना जिले के खटगांव गांव में एक दिहाड़ी मजदूर के घर जन्मीं प्रवीण तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं और अपने परिवार को सहारा देने की जिम्मेदारी उठाती हैं। वह ऊना के एक निजी स्कूल में फिजिकल एजुकेशन टीचर (पीईटी) हैं। वह नौकरी इसलिए करती हैं ताकि जिससे घर में आर्थिक स्थिरता बनी रहे और वह फुटबॉल के प्रति अपने जुनून को भी बनाए रख पाएं।

प्रवीण के लिए आसान नहीं था खेलना

प्रवीण का इस खेल में आना बिल्कुल भी आम नहीं था। ऐसे समय में जब उनके गांव में लड़कियों को खेल खेलने से रोका जाता था, प्रवीण ने किसी सामाजिक विरोध या सही कोचिंग की कमी की परवाह किए बिना लड़कों के साथ ट्रेनिंग शुरू की। धीरे-धीरे, उन्होंने अपने आस-पास की कुछ लड़कियों को इकट्ठा किया, एक छोटी टीम बनाई, जिसने बिना किसी संसाधन, मार्गदर्शन या नियमितता, लेकिन पूरे विश्वास के साथ ट्रेनिंग की।

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प्रवीण कुमारी के मुताबिक, ‘जिंदगी आसान नहीं है, खासकर जब कोई लड़की खेल में आगे बढ़ना चाहती है। दस साल पहले जब मैंने ट्रेनिंग शुरू की थी, तो हमारे गांव में सिर्फ लड़कों को ही बढ़ावा दिया जाता था। लड़कियों के लिए कोई जगह नहीं थी। मैंने लड़कों के साथ ट्रेनिंग शुरू की। फिर धीरे-धीरे कुछ और लड़कियों को भी खेलने के लिए राजी किया।

प्रवीण कुमारी कहती हैं, बिना किसी फॉर्मल ट्रेनिंग के यह सब नियमित संभव नहीं था, लेकिन हम अगली पीढ़ी की लड़कियों के लिए एक मिसाल कायम करना चाहते थे और धीरे-धीरे चीजें ठीक हो रही हैं। अब हमारे पास एक पूरी टीम है। हम नियमित स्थानीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेते हैं।’

हिमाचल प्रदेश ने दिखाया गजब जज्बा

खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 में हिमाचल प्रदेश की टीम ने भी एक नई मिसाल कायम की। हिमाचल प्रदेश की टीम का बीच सॉकर के साथ पहला अनुभव था। टीम ने टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से पहले लगभग 10 दिनों तक एक खास तौर पर तैयार रेत के मैदान में ट्रेनिंग की थी, लेकिन बीच पर खेलना फिर भी एक चुनौती थी क्योंकि गेम तेज होता और खिलाड़ी बहुत जल्दी थक जाते हैं, लेकिन तारीफ करनी होगी कि हिमाचल प्रदेश ने मैच में दबदबा बनाए रखा।

इलाज करा मैदान पर फिर लौटीं प्रवीण कुमारी

मैच में जब स्कोर 4-4 से बराबरी पर था तभी प्रवीण कुमारी के पैर में चोट लग गई और टीम ने एक गोल खा लिया। प्राथमिक चिकित्सा के बाद मैदान पर लौटने पर प्रवीण अपनी टीम के साथियों को हौसला देती रहीं और DNH&DD के हमलों को रोककर हिमाचल प्रदेश को खेल में बनाए रखा। बता दें कि बीच सॉकर में रोलिंग सब्स्टीट्यूशन की इजाजत होती है।

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प्रवीण ने बताया, ‘चोट एक अहम समय पर लगी, हमने शुरुआती बढ़त लगभग गंवा दी थी, लेकिन लड़कियों को सही समय पर वापसी करने का श्रेय जाता है। कुल मिलाकर हम परफॉर्मेंस से बहुत खुश हैं, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। हमें अब इस लय को बनाए रखना है।’