भारत की युगल विशेषज्ञ ज्वाला गुट्टा ने पदम पुरस्कार नहीं मिलने पर गुरुवार (26 जनवरी) को सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाली और कहा कि ये पुरस्कार उन्हें मिलते हैं जो सिफारिशी पत्र लेकर जाते हैं। ज्वाला फेसबुक पोस्ट पर लिखा, ‘मुझे किसी खास पुरस्कार के लिये आवेदन करने की अवधारणा पर हमेशा हैरानी होती है जो कि देश के प्रतिष्ठित पुरस्कार हैं। लेकिन इसी तरह से इन्हें खरीदा जा सकता है और इसलिए मैंने आवेदन किया। इसलिए आवेदन किया क्योंकि इन्हें हासिल करना प्रतिष्ठा माना जाता है क्योंकि मुझे लगता है कि मैंने अपने देश का नाम रोशन किया और मैं इसकी हकदार हूं।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं पिछले 15 से भी अधिक वर्षों से देश के लिये खेल रही हूं और मैंने कई प्रतिष्ठित टूर्नामेंट जीते हैं। मुझे लगा कि इसके लिये आवेदन करना चाहिए लेकिन मुझे लगता है कि यह पर्याप्त नहीं है। आपको सिफारिश की जरूरत पड़ती हैं। आपको इसके लिये सिफारिश की जरूरत होती है कि आप इसके हकदार हो।’ इस शटलर ने कहा, ‘आपको इनके लिये सिफारिशी पत्रों की जरूरत होती है लेकिन मेरा सवाल अब भी ज्यों का त्यों है कि मैं पुरस्कार के लिये क्यों आवेदन करूं और फिर सिफारिश के लिये क्यों कहूं।’ ज्वाला ने यह भी याद दिलाया कि वह राष्ट्रमंडल खेलों में दो बार पदक जीत चुकी है और उनके नाम पर एक स्वर्ण और एक रजत दर्ज है। उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में भी पदक जीता है।

लगातार दूसरे साल पद्म भूषण पुरस्कार की अनदेखी किये जाने के बाद 16 बार के विश्व चैम्पियन क्यू खिलाड़ी पंकज आडवाणी ने कहा कि वह नहीं जानते कि उन्हें इस सम्मान को हासिल करने के लिये क्या करना चाहिए। आडवाणी ने पिछले साल आठ विश्व खिताब अपने नाम किये, कर्नाटक सरकार और भारतीय बिलियर्ड्स एवं स्नूकर महासंघ ने देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार के लिये उनके नाम की सिफारिश की थी। भारत के महान क्यू खिलाड़ियों से एक आडवाणी ने फिर से इन पुरस्कारों के लिये अनदेखी किये जाने के बाद ज्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन उन्होंने अपनी बात सोशल मीडिया पर साझा की। आडवाणी ने खेल मंत्री विजय गोयल द्वारा इस हफ्ते के शुरू में पुणे में 28वां राष्ट्रीय खिताब जीतने पर बधाई दिये जाने के जवाब में ट्वीट किया, ‘शुक्रिया सर। 16 विश्व खिताबों और दो एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक के बाद अगर मेरी पद्म भूषण के लिये अनदेखी होती है तो मुझे नहीं पता कि मुझे क्या करना चाहिए।’