संदीप भूषण
आज तकनीक ने सभी कामों को आसान बना दिया है। दुनिया के किसी भी क्षेत्र का आगे बढ़ना वहां इस्तेमाल में लाई जा रही उच्च तकनीक और मशीनों पर ही निर्भर है। इसी तरह खेल जगत भी इससे अछूता नहीं है। रोजाना कोई न कोई ऐसी मशीन खेल का हिस्सा बन रही है जिसके सहारे खिलाड़ी अपनी क्षमता का सही आकलन कर उसका उपयोग कर पा रहे हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा दर्शक पाने वाला फुटबॉल हो या भारत में धर्म माना जाने वाला क्रिकेट, इनमें तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।
एथलेटिक्स को सिर्फ पावर गेम के तौर पर देखा जाता रहा है लेकिन इसमें भी कई उच्च तकनीक के गैजेट खेल और खिलाड़ियों की मदद कर रहे हैं। 2020 ओलंपिक की तैयारियों के मद्देनजर भारतीय एथलीटों के लिए भी इस तरह के गैजेट उनकी क्षमता और प्रदर्शन को निखारने में लाभप्रद साबित हो सकते हैं।
दरअसल, भारतीय खेल जगत में आमतौर पर यह कहते सुना जा सकता है कि हमारे एथलीट अफ्रीकी मूल के एथलीटों या दक्षिणी अमेरीकी एथलीटों का मुकाबला कर सकने में सक्षम नहीं हैं। इसके पीछे उनके यहां की भगौलिक स्थिति को जिम्मेदार बताया जाता है। यह काफी हद तक सही भी है। अफ्रीकी या अमेरिकी एथलीट काफी मजबूत होते हैं। लेकिन, दूसरी तरफ आस्ट्रेलियाई और यूरोपीय देशों के एथलीट भी हैं जो अफ्रीकी एथलीटों जितने मजबूत नहीं होते लेकिन, वे विश्व पटल पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब सवाल है कि ऐसा क्यों हो रहा है। तो इसका सीधा जवाब है उच्च तकनीक का बेहतर इस्तेमाल।
इंटल कंपनी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले जहां मैराथन धावक या फर्राटा धावकों के प्रदर्शन को मापने के लिए स्टॉप वाच का उपयोग किया जाता था, वहीं अब इसकी जगह कई उम्दा गैजटों ने ले ली है। पहले उनके प्रदर्शन को सिर्फ समय और शारीरिक क्षमता के आधार पर आंका जाता था लेकिन अब कई पहलुओं पर इसकी समीक्षा होती है। इसमें एक्सेलेरोमीटर, मैग्नेटोमीटर और जाइरोस्कोप जैसी मशीनें एक सेकंड के भीतर एथलीट के शरीर का हर डाटा पेश कर देती हैं। इसके साथ ही वेयरेबल सेंसर जैसी तकनीक के सहारे एथलीट के रफ्तार, ताकत, उसके शरीर के तापमान, उसके आसपास के तापमान, उसके पैर का जमीन से संपर्क और दौड़ते वक्त उसके शरीर के कंपन को मापा जा सकता है। इस तरह की छोटी-छोटी और गहरी जानकारी से धावक और उसके प्रशिक्षक दोनों को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी।
इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए स्ट्रेड नाम की एक कंपनी ने ऐसा गैजेट तैयार किया है जिसे एथलीट के जूतों में फिट किया जा सकेगा। इसे एप्पल वाच जैसे स्मार्ट यंत्रों से जोड़ा जाएगा। इस गैजेट की मदद से बगैर मोबाइल फोन का इस्तेमाल किए सभी डाटा को देखा जा सकेगा। मसलन, मैराथन के बीच में ही किसी एथलीट को कोच के परामर्श की जरूरत पड़ती है, तब इस यंत्र की मदद से वह कुछ जरूरी डाटा के मुताबिक एक्सपर्ट निर्णय ले सकता है और तत्काल जीत की कोशिश कर सकता है।
इसके सहारे वह देख सकता है कि उसे फिनिश लाइन तक पहुंचने में कितनी देर लगेगी। अपने गति को वह कितना बढ़ा सकता है जिससे उसे जीत हासिल हो। गति के बढ़ाने या घटाने से उसके शरीर पर तत्काल क्या प्रभाव हो रहा है। उसकी गति और हवा की गति में कितने का अंतर है। वह हवा के विपरीत भी किस गति से दौड़कर मंजिल को पा सकता है। इस तरह की कई छोटी-छोटी जानकारियां एथलीट मैराथन के बीच में ही देख सकता है।
इससे पहले इतनी जानकारी जुटाने के लिए वीओ2 का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इससे प्राप्त जानकारी के आधार पर ही कोच अपने खिलाड़ियों के लिए रणनीति तैयार करते हैं। लेकिन इसके उपयोग को लेकर एक अड़चन भी है। इसे लैब में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। स्ट्रेड के आने से इस सीमा को तोड़ते हुए एथलीट वीओ2 जितनी जानकारी कहीं भी और किसी समय प्राप्त कर सकता है।
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एलीट एचआरवी
इस गैजेट को 2014 में लाया गया था। इसमें एचआरवी का मतलब है, हार्ट रेट वैरिएबलिटी। मतलब, इस गैजेट के सहारे एक एथलीट के धड़कन को मापा जाता है। साथ ही उसके नर्वस सिस्टम का भी आकलन किया जाता है। इसमें दर्ज डाटा से मैच के दौरान खिलाड़ी के तनाव और उससे उबरने की पूरी प्रक्रिया को देखा जा सकता है। हाथ के अंगुलियों या फिर छाती के पास इसके सेंसर को लगाया जाता है और एक एप्लिकेशन के सहारे परिणाम को हासिल किया जाता है। इस गैजेट को बनाने वाली कंपनी के मुख्य वाणिज्य अधिकारी, विवेक मेनन ने कहा कि एथलीटों के फिटनेस और उनकी क्षमता को परखने के लिए पहले से इस्तेमाल हो रहे तरीके को और उच्च स्तर का बना रहे हैं। इससे आसानी और तेजी से बड़ी संख्या में डाटा हमारे सामने होगा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले जहां मैराथन धावक या फर्राटा धावकों के प्रदर्शन को मापने के लिए स्टॉप वाच का उपयोग किया जाता था, वहीं अब इसकी जगह कई उम्दा गैजटों ने ले ली है। पहले उनके प्रदर्शन को सिर्फ समय और शारीरिक क्षमता के आधार पर आंका जाता था। अब कई पहलुओं पर इसकी समीक्षा होती है। इसमें एक्सेलेरोमीटर, मैग्नेटोमीटर और जाइरोस्कोप जैसी मशीनें एक सेकंड के भीतर एथलीट के शरीर का हर डाटा पेश कर देती हैं।

