बीसीसीआइ अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने महेंद्र सिंह धोनी के कथित हितों के टकराव मसले पर अपने रवैये पर स्पष्टीकरण दिया और कहा कि एक समाचार पत्र ने उनके बयान को गलत छापा कि बोर्ड भारतीय वनडे टीम के कप्तान की जांच कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों में शनिवार को कहा गया है कि धोनी के कथित हितों के टकराव का बीसीसीआइ की तीन सदस्यीय अनुशासन समिति जांच कर रही है जिसमें डालमिया, केपी कजारिया और ज्योरादित्या सिंधिया शामिल हैं। डालमिया ने बीसीसीआइ के जारी बयान में कहा है कि ऐसा लगता है कि जहां तक महेंद्र सिंह धोनी का सवाल है तो मुझे गलत उद्धृत किया गया।

यह मामला धोनी के खेल प्रबंधन कंपनी रिति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्रा लि से जुड़े होने के कारण पैदा हुआ। यह कंपनी धोनी, सुरेश रैना और रविंदर जडेजा का काम देखती है और इसके अलावा वह आइपीएल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के विपणन का कार्य भी संभालती है। इस कंपनी की शुरुआत अरुण पांडे ने की थी जिन्हें धोनी का मित्र माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार धोनी के कंपनी में 15 फीसद शेयर हैं।

मीडिया रिपोर्टों में डालमिया के हवाले से कहा गया था कि धोनी के कथित हितों के टकराव पर अनुशासन समिति गौर कर रही है। रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया कि समिति की रिपोर्ट के बाद ही बीसीसीआइ इस मसले पर घोषणा करेगा। लेकिन डालमिया ने शनिवार को कहा कि उनका बयान गलत तरह से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि मैंने कहा था कि अजित चंदीला के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का मसला अभी बोर्ड की अनुशासनात्मक समिति के सामने अंतिम फैसले के लिये लंबित पड़ा है।

डालमिया ने कहा कि जब मुझे धोनी की रिति स्पोर्ट्स में भागीदारी के बारे में पूछा गया तो मैंने केवल इतना कहा कि मेरा इरादा बीसीसीआई के 2013 में लिए गए फैसले को लागू करने का है जब मैंने 20 जुलाई, 2013 को कोलकाता के ताज बंगाल होटल में बीसीसीआइ कार्यकारी समिति की बैठक की अध्यक्षता की थी। तब कहा गया था कि खिलाड़ियों का अगर किसी खेल प्रबंधन कंपनी में किसी तरह की भागीदारी या हित जुड़े हैं तो उन्हें इसको घोषित करना होगा।