भारतीय कप्तान विराट कोहली और पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने शुक्रवार (15 जून) को अपना फिटनेस टेस्ट दिया। फिटनेस टेस्ट के नतीजों से ही तय होगा कि वह यूके में 27 जून से आयोजित होने जा रही प्रतियोगिता में शामिल हो पाएंगे या नहीं। हालांकि विराट पूरे आईपीएल के दौरान अपनी गर्दन की चोट से जूझते रहे। चोट ने यूके के दौरे के लिए विराट तैयारियां करने में पीछे रह गए। वहीं यूके के सरे में होने वाली काउंटी चैंपियनशिप से भी उन्हें अपना नाम वापस लेना पड़ा था। भारतीय क्रिकेट टीम के प्रबंधन ने किसी भी विदेशी दौरे से पहले योयो टेस्ट को खिलाड़ियों के लिए अनिवार्य मानक बना दिया है।
टेस्ट शुक्रवार को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी, बेंगलुरु के मैदान पर लिया गया। इस दौरान टीम इंडिया के ट्रेनर शंकर बसु और अन्य सहायक स्टाफ मौजूद था। कोहली के साथ ही धोनी, सुरेश रैना, भुवनेश्वर कुमार और घायल केदार जाधव (यूके जाने के लिए संभावित खिलाड़ियों में शामिल नहीं) ने भी हिस्सा लिया। हालांकि खिलाड़ियों के प्राप्तांक का पता नहीं चल सका है लेकिन न्यूनतम प्राप्तांक 16.1 हैं। कोहली इस दौरान किसी तकलीफ में नहीं दिखे और आसानी से धोनी के साथ गति मिलाकर टेस्ट लेते दिखाई दिए।
लेकिन टेस्ट देने के बाद वह जरूर अपने कंधे और कमर को सहलाते दिखे। ऐेसे में जब योयो टेस्ट ही टीम में प्रवेश पाने का मूल पैमाना हो। लेकिन उनकी गर्दन की चोट ही ये तय करेगी कि वह आयरलैंड में 27 से 29 जून के बीच आयोजित होने वाले टी—20 इंटरनेशनल मुकाबले में खेल पाएंगे या नहीं। इंग्लैंड के दौरे पर जाने वाली टीम को तीन टी—20 अंतरराष्ट्रीय मैच, तीन एक दिवसीय और पांच टेस्ट मैच खेलने हैं, जो 3 जुलाई से शुरू होने वाले हैं।
क्या है यो-यो टेस्ट: टीम इंडिया के कंडिशनिंग कोच शंकर बासु ने खिलाड़ियों के लिए रैंडम फिटनेस टेस्ट ज़रूरी बना दी है। इसके तहत खिलाड़ियों को कड़ी ट्रेनिंग से गुज़रना होता है।खिलाड़ियों की फिटनेस को तय करने वाला ‘यो-यो टेस्ट’ बासु की परियोजना है। इसी के तहत संजू सैमसन और मोहम्मद शमी को टीम से बाहर रखा गया है।
ऐसे होता है टेस्ट पास: खिलाड़ियों की फिटनेस परखने के लिए यो-यो टेस्ट ‘बीप’ टेस्ट का एडवांस वर्जन है। 20-20 मीटर की दूरी पर दो लाइनें बनाकर कोन रख दिए जाते हैं। एक छोर की लाइन पर खिलाड़ी का पैर पीछे की ओर होता है और वह दूसरे की तरफ वह दौड़ना शुरू करता है। हर मिनट के बाद गति और बढ़ानी होती है और अगर खिलाड़ी वक्त पर लाइन तक नहीं पहुंच पाता तो उसे दो बीप्स के भीतर लाइन तक पहुंचना होता है। अगर वह ऐसा करने में नाकाम होता है तो उसे फेल माना जाता है। औसतन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी यो-यो टेस्ट में 21 का स्कोर करते हैं। टीम इंडिया में विराट, रवींद्र जाडेजा, मनीष पांडे लगातार यह स्कोर हासिल कर रहे हैं, जबकि बाकी खिलाड़ियों का स्कोर या तो 19.5 है या उससे ज़्यादा। इंडियन टीम के लिए अभी तक ये स्कोर 16.1 का रखा गया था।
