पैर की चोट से उबरने के दौरान पीवी सिंधु के लिए यह समय सिर्फ शारीरिक रिकवरी ही नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी रहा। लंबे समय तक कोर्ट से दूर रहने के दौरान उन्हें उन सवालों का सामना करना पड़ा, जो अक्सर किसी खिलाड़ी के करियर में रुकावट आने पर मन में उठते हैं। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधु अक्टूबर 2025 के बाद से पैर की चोट के कारण बीडब्ल्यूएफ टूर्नामेंट्स से दूर रहीं।
पीवी सिंधु को अंतिम समय में सैयद मोदी इंटरनेशनल से वापसी का प्लान टालना पड़ा। मलेशिया ओपन सुपर 1000 से वापसी की, जहां वह सेमीफाइनल तक पहुंचीं। चीन की विश्व नंबर दो वांग झी यी के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्हें हार झेलनी पड़ी।
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पीवी सिंधु ने इंडिया ओपन सुपर 750 से पहले मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मानसिक रूप से भी यह ब्रेक मेरे लिए बहुत जरूरी था। जब आप चोटिल होते हैं तो आपके मन में कई सवाल आते हैं। मैं कहां खड़ा हूं, क्या मैं 100 प्रतिशत वापसी कर पाऊंगी या नहीं?’ पीवी सिंधु ने बताया कि चोट के दौरान खुद से जवाब मांगने का यह दौर उन्हें मानसिक रूप से और मजबूत बनाकर लौटा है। उन्होंने कहा, ‘यह ब्रेक मुझे और ज्यादा मजबूत और बेहतर बनाकर वापस लाया है।’
पैर की अंगुली में आया था टियर
पीवी सिंधु को यह चोट तब लगी जब वह अजीब तरीके से गिर गईं और उनका पैर मुड़ गया, जिससे उनके पैर की बड़ी अंगुली में हल्का टियर आ गया। पीवी सिंधु ने कहा, ‘बैडमिंटन में फुटवर्क सबसे अहम होता है। आपको हमेशा पंजों पर तेज रहना होता है, इसलिए वापसी से पहले पूरी तरह फिट होना जरूरी था।’
पीवी सिंधु ने साफ किया कि वह 50 प्रतिशत फिटनेस के साथ कोर्ट पर उतरने का जोखिम नहीं लेना चाहती थीं। उन्होंने कहा, ‘बिना आत्मविश्वास के खेलने से बेहतर है कि पूरी तरह फिट होकर वापसी की जाए।’ ऑफ-सीजन के दौरान सिंधु ने अपने पुराने स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच वेन लोम्बार्ड के साथ दोबारा काम शुरू किया। सिंधु लोम्बार्ड के साथ वह ओलंपिक साइकल के दौरान भी काम कर चुकी हैं।
वेन लोम्बार्ड के साथ दोबारा ट्रेनिंग
पीवी सिंधु ने कहा, ‘हमने करीब दो महीने पहले फिर से ट्रेनिंग शुरू की। अब फोकस किसी एक चीज पर नहीं, बल्कि पूरे शरीर की देखभाल और रिकवरी पर है। जो तरीका 5-10 साल पहले काम करता था, जरूरी नहीं कि वह आज भी करे।’ उन्होंने बताया कि कभी-कभी जिम से ज्यादा रिकवरी जरूरी होती है और शरीर की जरूरत को समझना सबसे अहम है।
अमेरिका में रिहैब
चोट के दौरान सिंधु अमेरिका भी गईं, जहां उन्होंने अटलांटा में एक रिहैब सेंटर में इलाज कराया। पीवी सिंधु ने कहा, ‘यह ब्रेक पूरी तरह बेकार नहीं गया। मैंने वहां रिहैब किया, परिवार के साथ वक्त बिताया और बेहतरीन ट्रेनर्स और फिजियो के साथ काम किया।’ पीवी सिंधु ने दिसंबर के मध्य में ही फुल ट्रेनिंग शुरू की।
वर्ल्ड चैंपियनशिप पर नजर
पीवी सिंधु ने कहा, ‘मलेशिया ओपन मेरा पहला टूर्नामेंट था। मैंने एक-एक मैच पर फोकस किया और फिजिकली सब ठीक लगा।’ इस साल भारत में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स सिंधु के लिए बड़ी चुनौती और बड़ा मौका हैं। उन्होंने कहा, ‘होम ग्राउंड पर वर्ल्ड चैंपियनशिप खेलना खास होगा। दबाव रहेगा, लेकिन अपने देश में खेलना एक शानदार अनुभव होता है।’
बदल चुका है महिलाओं का खेल
पीवी सिंधु ने माना कि महिला सिंगल्स का खेल अब पहले से ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया है। उन्होंने कहा, ‘अब डिफेंस मजबूत हो चुका है, रैलियां लंबी होती हैं और आपको धैर्य रखना पड़ता है।’ उन्होंने कहा कि अपनी पीढ़ी के खिलाड़ियों को अब भी खेलते देखना उन्हें प्रेरणा देता है, वहीं युवा खिलाड़ियों के साथ ट्रेनिंग करना उन्हें नई ऊर्जा देता है।
एथलीट्स कमीशन की जिम्मेदारी
बीडब्ल्यूएफ एथलीट्स कमीशन की चेयरपर्सन बनने के बाद पीवी सिंधु पर अब अतिरिक्त जिम्मेदारी भी है। पीवी सिंधु ने कहा, ‘यह भूमिका सिर्फ मेरे खेल तक सीमित नहीं है। इसमें खिलाड़ियों की समस्याओं, प्रैक्टिस कंडीशन, मैच की परिस्थितियों और वर्कलोड जैसे मुद्दों को समझना और उठाना शामिल है।’ उन्होंने कहा कि वर्कलोड मैनेजमेंट लंबे समय से खिलाड़ियों की चिंता का विषय रहा है और इस पर संतुलित तरीके से काम करने की जरूरत है। U19 World Cup: वैभव सूर्यवंशी के निशाने पर 3 रिकॉर्ड, शिखर धवन, डेवाल्ड ब्रेविस और सरफराज खान को छोड़ेंगे पीछे?
