इंग्लैंड में इंग्लैंड के खिलाफ पहली बार सीरीज खेलना किसी भी क्रिकेटर के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह दौरा करियर को संवार सकता है या आत्मविश्वास को तोड़ सकता है। सचिन तेंदुलकर ने 17 साल की छोटी उम्र में इंग्लैंड का पहला दौरा किया था। उन्होंने दुनिया को भविष्य की झलक दिखाई थी और बताया था कि अगले 2 दशक कैसे होने वाले हैं।
क्रिकेट प्रशंसकों को याद होगा कि तेंदुलकर ने 1990 के इंग्लैंड दौरे के दूसरे टेस्ट में ओल्ड ट्रैफर्ड में शतक जड़कर मैच बचाया था। तेंदुलकर ने पहली पारी में 68 रन बनाए थे, जबकि दूसरी पारी में नाबाद 119 रनों की पारी ने मेहमान टीम को हार से बचाया था। यह तेंदुलकर का पहला टेस्ट शतक था। लोगों को यह पता होगा वह उस समय टेस्ट शतक बनाने वाले दूसरा सबसे कम उम्र का खिलाड़ी बन गए थे, लेकिन यह शायद ही पता हो कि तेंदुलकर अपनी दसवीं कक्षा की परीक्षा की तैयारी के लिए किताब लेकर इंग्लैंड ले गए थे।
कपिल देव ने किया खुलासा
दिग्गज कपिल देव ने 2013 में बीबीसी रेडियो 5 लाइव शो में तेंदुलकर के इंग्लैंड किताब ले जाने वाली बात का खुलासा किया था। उन्होंने कहा, “वह (तेंदुलकर) बहुत शांत स्वभाव के थे। उस पहले दौरे पर वह दसवीं कक्षा में पढ़ने के लिए अपनी स्कूल की किताबें लेकर गए थे। वह शर्मीले थे, ज्यादा बात नहीं करते थे और वह एक सामान्य बच्चे की तरह थे। वह बातों में उलझते नहीं थे। वह हमेशा चीजों को भापते रहते थे।”
किसी को इतना भारी बल्ला इस्तेमाल करते नहीं देखा था
कपिल ने आगे बताया कि उस दौरे पर तेंदुलकर की बल्लेबाजी और उनके व्यक्तित्व के कुछ पहलुओं से वह भी हैरान थे। उन्होंने कहा, “उस उम्र में उनके बारे में दो बातें बहुत अलग थीं। उनका संतुलन बहुत अच्छा था… अविश्वसनीय! और वह गेंद को हिट नहीं करते थे, बल्कि गेंद को धकेलते थे! उनके पास एक भारी बल्ला था। उस दौरान मैंने कभी किसी को इतना भारी बल्ला इस्तेमाल करते नहीं देखा था और वह बल्ला नीचे की ओर पकड़ते थे।”
कपिल देव ने और क्या कहा?
कपिल ने तेंदुलकर को लेकर कहा, “अपने बाएं हाथ से वह लिखते और खाते थे। लेकिन बल्लेबाजी और गेंदबाजी दाएं हाथ से करते थे। बाद में, मुझे एहसास हुआ कि वह प्रतिभाशाली व्यक्ति ही होगा, जिसके दोनों हाथों में ताकत है। यही क्रिकेट का भविष्य है। अगर आपके पास संतुलित ताकत है तो आप गेंद को नियंत्रित कर सकते हैं और अपने शरीर का संतुलन बनाए रख सकते हैं।”
