दीपा मलिक खेल रत्न हासिल करने वाली पहली महिला पैरा-एथलीट बन गई हैं। शनिवार को भारत सरकार ने दीपा को देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार देने का निर्णय लिया है। वे यह पुरस्कार पाने वाली दूसरी पैरा-एथलीट बन गई हैं। दीपा पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। उन्होंने समर पैरालंपिक -2016 में शॉट पुट (गोलाफेंक) में रजत पदक हासिल किया था। 2018 में दुबई में पारा एथलीट ग्रांड पिक्स में एफ-53/54 जेवलिन में स्वर्ण पदक जीता था। वे वर्तमान में एफ-53 श्रेणी में दुनिया की नंबर वन खिलाड़ी हैं।
दीपा ने सब-जीरो तापमान में 8 दिन, 1700 किलोमीटर की यात्रा करके रेड डी हिमालय की 18000 फीट की चढ़ाई की थी। इस यात्रा में दूरदराज के हिमालय, लेह, शिमला और जम्मू सहित कई कठिन रास्ते शामिल थे। इस चढ़ाई के साथ उन्होंने साबित कर दिया था कि वे मजबूत आत्मबल और इरादों वाली हैं और उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता, चाहे वह शरीरिक विकलांगता हो या फिर लिंग या फिर उम्र ही क्यों न हों। दीपा का चलना-फिरना पिछले 17 साल से बंद है। दरअसल 17 साल पहले उन्हें रीढ़ में ट्यूमर हो गया था। इलाज के दौरान उनका 31 बार ऑपरेशन किया गया जिसके लिए उनकी कमर और पांव के बीच 183 टांके लगे थे। इसके बावजूद उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया। दीपा मलिक कर्नल बिक्रम सिंह की पत्नी और दो बच्चों की मां हैं।
यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है। खेल रत्न मिलने पर दीपा मलिक ने एक साक्षात्कार में कहा कि ‘मैंं बहुत खुश हूं क्योंकि मैं हमेशा आगे देखती हूं। यह पूरी यात्रा विकलांगता के प्रति लोगों के दृष्टिकोण और विकलांगता वाले लोगों में छिपी क्षमता को बदलने के बारे में अधिक रही है। मुझे लगता है कि इससे उन महिला एथलीट को प्रेरणा मिलेगी जो विकलांग हैं। स्वतंत्र भारत को पैरा-ओलंपिक में पदक जीतने में 70 साल लग गए।’ पैरा-एथलीट होने के साथ वे खेल मंत्रालय और शारीरिक शिक्षा पर 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) में कार्य समूह की एक सदस्य है। दीपा एनएमडीसी के लिए ‘स्वच्छ भारत’ की ब्रांड एंबेसडर और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के ‘स्मार्ट सिटी’ प्रोजेक्ट के लिए विकलांगता समावेशी बुनियादी ढांचे की विशेषज्ञ सलाहकार भी हैं। खेल के साथ लेखनी और सामाजिक कार्यों में भी वे बढ़ चढ़ हिस्सा लेती हैं।
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दीपा ने 2011 में वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता तो उसी साल शारजाह में वर्ल्ड गेम्स में दो कांस्य पदक जीते। 2012 में मलेशिया ओपन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में जेवलिन व डिस्कस थ्रो में दो स्वर्ण पदक जीते। इसी साल उन्हें 42 वर्ष की आयु में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 2014 में चाइना ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप बीजिंग में शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीता था। 2017 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने एशियन पैरा गेम्स 2018 में एक नया एशियाई रेकॉर्ड बनाया और 3 लगातार एशियाई पैरा खेलों (2010, 2014, 2018) में पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय महिला हैं। उन्हें 58 राष्ट्रीय और 23 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं।
