भारत और इंग्लैंड के बीच पुणे वनडे अपने आप में ऐतिहासिक महत्व रखता है। लगभग 10 साल बाद भारतीय वनडे और टी20 टीमों की कप्तानी का हस्तांतरण महेंद्र सिंह धोनी से विराट कोहली को हुआ। मैच का नतीजा भी भारत के पक्ष में रहा और टीम इंडिया ने रिकॉर्ड तीसरी बार 350 या इससे ज्यादा का स्कोर हासिल कर लिया। कोहली पूर्णकालिक कप्तानी के पहले मैच में अपने रंग में नजर आए और शतक जड़ा। 2007 के बाद पहली बार धोनी टीम में केवल विकेटकीपर और बल्लेबाज की भूमिका में नजर आए। लेकिन कई मौके ऐसे आए जब कप्तानी का उनका असर साफ देखने को मिला। खुद विराट कोहली ने भी कई मौकों पर फैसले के लिए धोनी का रूख किया।
धोनी ने भी कप्तानी छोड़ने के बावजूद टीम के सबसे सीनियर खिलाड़ी की जिम्मेदारी को अपना लिया। इंग्लैंड की पारी के सातवें ही ओवर में धोनी की होशियारी देखने को मिली। इस ओवर में जसप्रीत बुमराह ने डीप फाइन लेग से सीधे थ्रो फेंककर नॉन स्ट्राइकर एंड पर स्टंप बिखेर दिए। कप्तानी कोहली और बाकी खिलाड़ी विकेट का जश्न मनाने लगे हालांकि फैसला तीसरे अंपायर के पास भेजा गया। लेकिन थ्रो लगने के बावजूद गेंद डैड नहीं हुई थी और बल्लेबाज अतिरिक्त रन ले सकते थे। केवल धोनी ने ही इस संभावना पर ध्यान दिया और ऑफ साइड में खड़े फील्डर को गेंद रोकने को कहा।
दर्शकों और वुवुजेला के शोर के चलते विराट कोहली के लिए कई बार अपना मैसेज फील्डर्स तक भेजना मुश्किल साबित हुआ। ऐसे समय में धोनी ने कप्तान की मदद की। ऐसा ही एक वाकया नौवें ओवर के दौरान हुआ जब शिखर धवन को कोहली स्लिप से हटाकर मिडविकेट पर लगाना चाहते थे लेकिन शोर के चलते उनकी आवाज नहीं पहुंची। लेकिन धोनी का ध्यान कोहली की ओर था और उन्होंने कप्तान का मैसेज धवन तक पहुंचा दिया। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान ने यह भी ध्यान रखा कि कोहली ने जो फील्डिंग लगाई है फील्डर उसी जगह पर खड़ा हुआ है या नहीं। गलती होने पर उन्होंने इसमें सुधार भी किया। साथ ही उन्होंने कोहली से फील्ड लगाने की वजह भी पूछी। 29वें ओवर में जब कोहली ने रवींद्र जडेजा के ओवर में पॉइंट के फील्डर को सर्कल के अंदर तैनात किया तो उन्होंने धोनी को बताया कि जो रूट वहां से सिंगल ना चुरा पाए इसलिए ऐसा किया गया है।
धोनी ने हालांकि यह भी ध्यान रखा कि वे कहीं जरुरत से ज्यादा दखल ना दे दें। जब कोहली गेंदबाजों से बातें कर रहे थे तब धोनी दूर रहे। 47वें ओवर में जब उमेश यादव की गेंद पर छक्का लगा तो धोनी ने गेंदबाज के बजाय कप्तान को कमी दूर करने को कहा। कई मौके ऐसे भी आए जब फील्डर निर्देश के लिए कोहली के बजाय धोनी की ओर देख रहे थे। एक मजेदार वाकया तो उस समय हुआ जब हार्दिक पांड्या की गेंद पर अंपायर ने इयॉन मॉर्गन के विकेट की पीछे लपके जाने की अपील ठुकरा दी। इस पर धोनी ने तुरंत डीआरएस ले लिया। वे भूल गए कि अपील कप्तान को करनी होती है। इसके बाद विराट कोहली ने अपील की। धोनी की अपील कामयाब रही और मॉर्गन आउट दिए गए।

