जोश, जूनून, करतब, कमाल, रिकॉर्ड्स ये सारी चीेजें क्रिकेट के खेल में मैदान पर एक साथ देखने को मिलती हैं। क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें आप संभावनाएं नहीं लगा सकते, क्योंकि यह गेम कब कौन सी करवट लेले किसी को नहीं पता। इसीलिए क्रिकेट को महान अनिश्चितताओं वाला खेल भी कहा जाता है, ‘द गेम आॅफ ग्रेट अनसर्टेनिटी।’ इस खेल में व्यथा और आनंद दोनों साथ साथ चलेते हैं जिन्हें हम अंग्रजी में ‘एगनी’ और ‘एक्स्टसी’ कहते हैं। लेकिन दुनिया में शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जो विवादों से वंचित रहा हो, इसलिए क्रिकेट भी इसमें शामिल है। क्रिकेट में कई ऐसे वाकये हैं जब मशहूर और बड़े खिलाड़ियों ने कुछ बोला हो और उनके कथन ने विवाद को जन्म दे दिया हो। हालांकि, बाद में इन खिलाड़ियों ने अपने वक्तव्य पर खेद भी प्रकट किया है। एक बार फिर क्रिकेट जगत अपने अपने समय के दिग्गज खिलाड़ी रह चुके इयान चैपल और शोएब अख्तर के बयानों से गुंजायमान है।
दरअसल, इयान चैपल ने आॅस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान के एकतरफा हार के बाद बयान दे दिया कि पाकिस्तानियों को क्रिकेट खेलने नहीं आता, जबतक वो अपने खेल के स्तर में अभूतपूर्व सुधार नहीं कर लेते आॅस्ट्रेलिया को उनको अपने यहां क्रिकेट खेलने के लिए बुलाना ही नहीं चाहिए। इयान चैपल के इस बयान के बाद पाकिस्तान के पूर्व तूफानी गेंदबाज शोएब अख्तर ने भी बयान दे दिया और कहा, ‘ये सही है कि पाकिस्तानी टीम ने हाल के वर्षों में अच्छी क्रिकेट नहीं खेली है और उसके खेल के स्तर में गिरावट आयी है। लेकिन हमने इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम को इसी साल 2-2 से ड्रॉ पर रोका। इयान चैपल जो तर्क दे रहे हैं उस हिसाब से तो इंग्लैंड को वनडे विश्व कप में भाग ही नहीं लेना चाहिए, क्योंकि उन्होंने आज तक वर्ल्डकप नहीं जीता है।’ हम आपको क्रिकेट खिलाड़ियों के ऐसे ही कुछ बयानों से रू-ब-रू करा रहे हैं, जिन पर पहले भी बवाल मच चुका है…

शाहिद आफरीदी: साल 2011 में विश्वकप सेमीफाइनल में भारत से हारने के बाद शाहिद आफरीदी ने एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल पर बोलते हुए बयान दिया था, ‘अगर मैं सच कहूं तो भारतीयों के पास हमारे जितना बड़ा दिल नहीं हो सकता। मुझे नहीं लगता कि भारत के लोगों के पास इतना बड़ा और साफ दिल है जितना अल्लाह ने हम पाकिस्तानियों को दिया है।’ मोहाली में भारत से हारने के बाद शाहिद आफरीदी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़ा किया जा रहा था और उनकी आलोचना हो रही थी, जिसके बाद उन्होंने ये बयान दिया था।

कुमार संगकारा: कुमार संगकारा ने 2011 में प्रतिष्ठित एमसीसी काउड्रे लेक्चर के दौरान श्रीलंकाई क्रिकेट में राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार पर टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘श्रीलंका में क्रिकेट और राजनीति एक दूसरे के पर्यायवाची बन चुके हैं। श्रीलंका के क्रिकेट प्रशासन में राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते जवाबदेही और पारदर्शिता जैसी कोई चीज नहीं बची है। पैसे और पॉवर की ये जंग श्रीलंकाई क्रिकेट को बर्बादी के कगार पर पहुंचा देगी।’ संगकारा के इस बयान के बाद श्रीलंका में काफी बवाल मचा था।

मालकल वॉन: भारत 2011 में जब इंग्लैंड के दौरे पर गया था तो एक टेस्ट मैच के दौरान इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने ट्वीट किया था, ‘लक्ष्मण ने बैट पर वैसलीन लगाया था जिससे हॉट स्पॉट में स्कैन के दौरान गेंद और बल्ले के बीच का सम्पर्क पकड़ में ना आए।’ उनके इस बयान के बाद काफी हो हल्ला मचा था। विश्व क्रिकेट में वीवीएस लक्ष्मण को बहुत ही साफ सुथरे और ईमानदार क्रिकेटर के रूप में जाना जाता है। उनके उपर वॉन का यह आरोप भारतीय क्रिकेट प्रमियों को फाफी नागवांर गुजरा था।

स्टीव वॉ: आॅस्टेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ ने भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को लेकर बयान दिया था, ‘सौरव गांगुली का व्यवहार अपमानजनक था क्योंकि वो हमेशा टॉस के लिए देर से आते थे।’ स्टीव वॉ ने ये बयान उस संदर्भ में दिया था, जब 2001 के भारत दौरे के दौरान सौरव गांगुली ने स्टीव वॉ को मैदान पर टॉस के लिए देर से पहुंचकर काफी इंतजार कराया था। सौरव ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि स्टीव वॉ ने भी पहले ऐसा ही व्यवहार उनके साथ किया था।

शोएब अख्तर: शोएब अख्तर ने कहा था, ‘मुझे लगता है कि मैच जिताउं और मैच फिनिशर खिलाड़ियों की सूची में सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ का नाम नहीं होना चाहिए। क्योंकि उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया और ना ही उनको मैच फिनिश करने की कला आती है।’ शोएब अख्तर की इस टिप्पणी से शायद ही कोई क्रिकेट प्रशंसक इत्तेफाक रखता हो। उनकी इस टिप्पणी के बाद काफी विवाद हुआ था और शोएब अख्तर सुर्खियों में जरूर आ गए थे।

अहमद शहजाद: पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के बल्लेबाज अहमद शहजाद ने कुछ समय पहले बयान दिया था, ‘अगर आप गैर इस्लामिक हैं और इस्लाम कबूल करते हैं तो आपने चाहे अपने जीवन में कितने भी गलत काम किए हों आपको जन्नत नसीब होगी।’ उनके इस बयान के बाद क्रिकेट जगत में उनकी काफी आलोचना हुई थी और उन्हें कट्टर बताया गया था।

केविन पीटरसन: इंग्लैंड के लिए खेलने वाले दक्षिण अफ्रीकी मूल के बल्लेबाज केविन पीटरसन ने अपने साथी खिलाड़ी मैट प्रॉयर के लिए कहा था, ‘वह पीठ में छुरा घोंपने वाला, भयानक आदमी है, वह टीम के लिए खतरा है।’ पीटरसन का यह बयान 2013 में आॅस्ट्रेलिया में खेली गई एशेज सीरीज के दौरान आया था। उस सीरीज में केविन पीटरसन और मैट प्रॉयर के बीच काफी मतभेद उभरकर सामने आया था। उस सीरीज के बाद से ही केविन पीटरसन इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम में दोबारा वापसी नहीं कर पाए।

ग्रेग चैपल: क्रिकेट के इतिहास में ग्रेग चैपल और सौरव गांगुली के बीच पनपे विवाद को हमेशा याद रखा जाएगा। सौरव गांगुली जब भारतीय टीम के कप्तान थे तब ग्रेग चैपल भारतीय टीम के कोच थे। उस दौरान इन दोनों के बीच रिश्ता काफी खराब हो गया था। ग्रेग चैपल ने गांगुली के बारे में बयान दिया था, ‘उनका यही उद्देश्य था कि अगर तुम मुझे परेशानी में डालोगे तो मैं तुम्हें परेशान करूंगा। वो चाहते थे कि मैं उनकी कप्तानी वाली भारतीय टीम का कोच होना अपने लिए सौभाग्य की बात समझूं। मैंने भारतीय टीम का कप्तान बने रहने में उनकी मदद की थी। मेरी पहली प्राथमिकता भारतीय क्रिकेट को नई सफलताओं तक पहुंचाना और भारतीय लोगों को खुशी देना था। मैं करोड़ो लोगों की उम्मीदों को ध्यान में रखकर काम कर रहा था और सौरव गांगुली चाहते थे कि मैं सिर्फ उनको ध्यान में रखकर काम करूं। मैं भारत को विश्व की नंबर एक टीम बनने में मदद करना चाहता था।’ ये बातें ग्रेग चैपन ने अपनी किताब ‘फियर्स फोकस’ में कहीं हैं, यह किताब 2011 में लॉन्च हुई थी।

वीरेंद्र सहवाग: वीरेंद्र सहवाग ने 2011 विश्वकप जीत के बाद मीडिया से बातचीत में कहा था, ‘हमने सिर्फ धोनी की कप्तानी की वजह से विश्वकप खिताब पर कब्जा नहीं किया, बल्कि टीम के 11 खिलाड़ियों ने इसके लिए मेहनत की थी।’ उनके इस बयान के बाद यह भी हवा उड़ी थी कि महेंद्र सिंह धोनी और वीरेंद्र सहवाग के रिश्ते ठीक नहीं हैं।

इयान चैपल: इयान चैपल ने वेस्टइंडीज में खेले गए 2007 वनडे विश्वकप में भारतीय टीम के बांग्लादेश से हारकर पहले ही दौर से बाहर होने के बाद सचिन तेंदुलकर के लिए कहा था,’यह सचिन के लिए अपने गिरेबान में झांकने का सही वक्त है। उन्हें यह जानना होगा कि वो क्या हासिल करना चाहते हैं। वह सिर्फ अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। उन्हें अब संन्यास ले लेना चाहिए। हालांकि, सचिन ने इस बयान के बाद 6 साल तक क्रिकेअ खेला और 2011 में वनडे विश्वकप टीम का हिस्सा भी रहे।

