क्रिकेट की किताब में किसी बल्लेबाज को आउट करने के 10 तरीकों के बारे में जिक्र है। हालांकि, इन दस तरीकों में से बल्लेबाज के आॅउट होने का एक तरीका टाइम आॅउट का भी है, जिस तरीके से आज तक के क्रिकेट इतिहास में बहुत ही कम बल्लेबाज पैवेलियन में बैठने को मजबूर हुए हैं। क्रिकेट में एलबीडब्लू (लेग बिफोर द विकेट) यानि पगबाधा बल्लेबाज के आउट होने का एक तरीका है, जिस पर बहुत अधिक बल्लेबाज अपना विकेट गवां देते हैं। पगबाधा यानी एलबीडब्लू में बल्लेबाज यदि विकेट के सामने पाया जाता है और गेंद उसके बल्ले की बजाय उसके पैड पर जाकर लगती है, तो उसे आउट करार दिया जाता है। हां इसके लिए कुछ शर्तें होती हैं, जैसे गेंद की अछाल अधिक ना हो और वह विकेट्स को हिट करती हो। गेंद जब बल्लेबाज के पैड पर उसके बल्ले को छकाते हुए लगे तो उस समय वह क्रीज में हो। गेंद पैड पर लगने से पहले बल्ले पर ना लगी हो। गेंदबाज ने नो बॉल ना फेंका हो, इत्यादि।
भारत के दो क्रिकेट खिलाड़ी सबसे ज्यादा बार पगबाधा आउट होने और पगबाधा आउट करने के मामले में पहले स्थान पर हैं। यह आंकड़े टेस्ट क्रिकेट के हैं। टेस्ट मैचों में सर्वाधिक बार एलबीडब्लू आउट होने का विश्व रिकॉर्ड भारत के सचिन तेंदुलकर के नाम है। वहीं, अनिल कुंबले में टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को एलबीडब्लू के जरिए आउट कर सबसे अधिक विकेट अपने खाते में जोड़ा है। सचिन तेंदुलकर अपने टेस्ट करियर में कुल 63 बार एलबीडब्लू आउट हुए हैं। उनके बाद वेस्टइंडीज के शिवनारायण चंद्रपॉल और इंग्लैंड के ग्राहम गूच का नंबर आता है, ये दोनों अपने टेस्ट करियर में क्रमश: 55 और 50 बार पगबाधा आउट हुए हैं।
गूच के बाद इंग्लैंड के मौजूदा कप्तान एलिस्टर कुक हैं, वह 47 बार पगबाधा आउट हुए हैं। सबसे ज्यादा पगबाधा आउट होने वाले शीर्ष 10 खिलाड़ियों की सूची में पाकिस्तान के बल्लेबाज यूनुस खान, कुक के बाद दूसरे बल्लेबाज हैं जो अभी भी खेल रहे हैं। यूनुस इस सूची में सातवें स्थान पर हैं। वह टेस्ट में अब तक कुल 43 बार पगबाधा आउट हुए हैं। विश्व क्रिकेट में एक ऐसा भी बल्लेबाज हुआ है, जो अपने करियर में कभी पगबाधा आउट नहीं हुआ है। वो हैं ऑस्ट्रेलिया के जोए डार्लिंग। जोए डर्लिंग ने 1884 से 1905 के बीच ऑस्ट्रेलिया के लिए कुल 34 टेस्ट मैच खेले और इस दौरान वो एक भी बार एलबीडब्लू आउट नहीं हुए।
वहीं, सबसे अधिक बार बल्लेबाजों को पगबाधा आउट करने के मामले में भारत के पूर्व स्पिनर अनिल कुंबले सबसे आगे हैं। कुंबले ने टेस्ट क्रिकेट में कुल 619 विकेट चटकाए हैं, जिनमें से 156 विकेट उन्होंने पगबाधा के जरिए हासिल किए हैं। उनके बाद मुथैया मुरलीधन का नंबर आता है, जिन्होंने अपने रिकॉर्ड 800 टेस्ट विकेटों में से 150 विकेट पगबाधा के जरिए हासिल किए हैं। इस सूची में तीसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के शेन वार्न हैं, जिन्होंने अपने कुल 708 टेस्ट विकटों में से 138 विकेट पगबाधा के जरिए लिए हैं।

