पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को हाल में वर्ल्ड कप-2019 के दौरान टीम इंडिया की प्लेइंग-XI में रखने पर कुछ आलोचकों ने सवाल खड़े किए थे। अब सिलेक्शन कमिटी के अध्यक्ष एमएसके प्रसाद ने इसका बचाव किया। प्रसाद ने कहा कि धोनी आज तक सीमित ओवरों में भारत के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर और फिनिशर हैं। प्रसाद से पीटीआई को दिए इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या धोनी को टीम में रखने के लिए मध्यक्रम के संतुलन से समझौता किया गया, तब उन्होंने कहा, ‘अगर शुरू में विकेट गंवाने के बाद हम विश्व कप सेमीफाइनल (न्यू जीलैंड के खिलाफ) जीत जाते तो फिर जडेजा और धोनी की पारियों को सर्वश्रेष्ठ पारियों में शामिल किया जाता।’ उन्होंने कहा, ‘मैं स्पष्ट तौर पर कह सकता हूं कि धोनी आज तक सीमित ओवरों में भारत के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर और फिनिशर हैं। विश्व कप में विकेटकीपर और बल्लेबाज के रूप में धोनी टीम के लिए बड़ी ताकत थे।’

बता दें कि वर्ल्ड कप-2019 के सेमीफाइनल में भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ शिकस्त झेलनी पड़ी। विराट कोहली की कप्तानी वाली टीम इंडिया को इस मैच में जीत के लिए 240 रन का टारगेट मिला था लेकिन वर्षा बाधित मुकाबले में टीम इंडिया 221 रन पर ऑलआउट हो गई। जडेजा ने सर्वाधिक 77 और धोनी ने 50 रन का योगदान दिया था। प्रसाद ने कहा, यदि हम दूरदर्शी नहीं थे तो फिर हार्दिक पांड्या कैसे सभी प्रारुपों में ऑलराउंडर की भूमिका बखूबी निभाता, जबकि पहले उन्हें भी केवल टी20 खिलाड़ी माना गया था। चयनसमिति के अध्यक्ष ने इस संबंध में कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल का भी उदाहरण दिया जिन्हें रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा जैसे स्थापित स्पिनरों की मौजूदगी के बावजूद सीमित ओवरों की टीम में रखा गया।

प्रसाद ने कहा, ‘इसी समिति ने कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल को आगे बढ़ाया जबकि सीमित ओवरों की टीम में हमारे पास अन्य स्थापित स्पिनर थे। उन्होंने कहा, अगर हम दूरदर्शी नहीं होते तो ऋषभ पंत कैसे इतने कम समय में टेस्ट टीम में जगह बना पाते, क्योंकि किसी ने नहीं सोचा था कि उन्हें लंबी अवधि के प्रारुप में जगह मिल पाएगी। (भाषा इनपुट के साथ)