श्रीलंका के कोलंबो में 13 से 24 दिसम्बर के बीच अंडर 19 यूथ एशिया क्रिकेट कप खेला जाएगा। करीब एक महीने पहले भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने इस टूर्नामेंट की भारतीय टीम के लिए 15 अंडर-19 क्रिकेटर्स को चुना था। इन सभी खिलाड़ियों को शुक्रवार से बेंगलुरु में अभ्यास शिविर में शामिल होना था, लेकिन एक दिन पहले गुरुवार को ही इनमें से 7 खिलाड़ियों को बताया गया कि वह इस टूर्नामेंट में खेलने के योग्य नहीं हैं। दरअसल बीसीसीआई से टूर्नामेंट में खेलने की पात्रता के लिए खिलाड़ियों की जन्मतिथि की कट ऑफ लिस्ट में गड़बड़ हो गई थी। एशियन क्रिकेट काउंसिल की लिस्ट के मुताबिक, टीम में सभी खिलाड़ी 1-9-1998 के बाद के होने चाहिए, वहीं बीसीसीआई ने सिलेक्टर्स और बोर्ड के ज्वाइंट सेक्रेटरी अमिताभ चौधरी को वर्ष 1997 बता दिया।
बीसीसीआई को जैसे ही गलती का पता लगा उसने नई टीम के संबंध में कोई भी प्रेस रिलीज जारी ना करते हुए चुप-चाप ऑफिशयल वेबसाइट पर खिलाड़ियों के नाम बदल दिए। हमारे सहयोगी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस को बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया, “यह एक बड़ी गड़बड़ी थी। किस्मत से इसका पता समय रहते ही चल गया। अगर टीम श्रीलंका चली जाती तो और तब हमें पता लगता तो हालात बद से बदतर हो जाते। सिलेक्टर्स को तुरंत इस बारे में बताया गया और जल्दी से उन सात नामों की जगह नए नाम चुने गए।”
खिलाड़ियों को जब आखिरी समय पर बताया गया कि वह टीम में खेलने के योग्य नहीं है तो उनके सपने मानों टूट से गए हों। इन सात खिलाड़ियों के नाम इस तरह हैं- दिग्विजय बिरंदर रांगी (हिमाचल प्रदेश), चंदन साहनी (हैदराबाद), डेरिल एस. फेरारियो (केरल), संदीप के. तोमर (यूपी), ऋषभ भगत (पंजाब), सिमरजीत सिंह (दिल्ली) और इजहान अशफाक सैय्यद (महाराष्ट्र)। मेरठ के रहने वाले संदीप तोमर के लिए पहली विदेश यात्रा थी। बोर्ड का फैसले उसके लिए धक्के की तरह था। तोमर ने बताया, “मुझे बड़ी खुशी थी, लेकिन अब मैं काफी दुखी हूं। मेरा वीजा और पासपोर्ट का काम पूरा हो चुका था। मैं कल बेंगलुरु जाने वाला था। मेरी मां ने कहा कि अगर किस्मत अच्छी हुई तो आगे फिर मौका मिलेगा।”

