चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मंगलवार (10 अप्रैल) को चेन्नई के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में IPL 2018 का महत्वपूर्ण मैच खेला गया था। सीएसके ने केकेआर को एक दिलचस्प मुकाबले में हराया था। लेकिन, मैच की पहली पारी में दर्शकों की ओर से दो बार जूते फेंके गए थे। हालांकि, खिलाड़ियों ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी। एक जूता तो अंतिम ओवर में छक्का मारकर मैच जिताने वाले चेन्नई के स्टार खिलाड़ी रविंद्र जडेजा पर भी फेंका गया था, जिसे उन्होंने फुटबॉल खेलने के अंदाज में मैदान से बाहर फेंक दिया था। यह घटना उस वक्त हुई जब केकेआर की टीम बल्लेबाजी कर रही थी। जडेजा बाउंड्री पर तैनात थे, जब दर्शकों की ओर से फेंका गया जूता उनके बेहद करीब गिरा था। इससे पहले फेंका गया जूता खिलाड़ियों से काफी दूर गिरा था। इससे पहले फाफ डु प्लेसिस पर भी जूता फेंका गया था। इन घटनाओं के बाद स्टेडियम में प्लेयर्स की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कावेरी जल बंटवारा विवाद का साया: तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेज जल बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। ऐसे में रजनीकांत के साथ ही कुछ राजनीतिक दलों ने चेन्नई में आईपीएल का मैच कराने पर ऐतराज जताया था। कई संगठनों ने स्टेडियम के बाहर विरोध-प्रर्शन करने की चेतावनी भी दी थी। हालांकि, इसको देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। खिलाड़ियों के अलावा स्टेडियम की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई थी। इसके बावजूद चेपक स्टेडियम में सीएसके और केकेआर के बीच मैच के दौरान प्लेयर्स पर जूता फेंकने की घटना सामने आई। बता दें कि इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने मैच से पहले चेपक स्टेडियम में सांप छोड़ने की धमकी दी थी। तमिल नेता वेलमुरुगन ने कहा था कि मैच होने की स्थिति में स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी समुदाय के लोग सांप छोड़ देंगे। इसे देखते हुए स्थानीय पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया था। मालूम हो कि कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच वर्षों से विवाद चलता आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया था। इस पर अमल नहीं होने पर राज्य सरकार दोबारा शीर्ष अदालत पहुंच गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दोबारा निर्देश दिया है।
