भारत के 15 वर्षीय निशानेबाज विहान शार्दुल ने गुरुवार (23 अगस्त) को ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया। ये उनका पहला एशियाई गेम्स है। सन 2014 में निशानेबाजी में कदम रखने वाले शार्दुल जकार्ता में जारी 18वें एशियाई खेलों के फाइनल में केवल एक अंक से स्वर्ण पदक से चूक गए। शार्दुल फाइनल में 73 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक दक्षिण कोरिया के शिन ह्यूवो को मिला, वहीं कतर के हामद अली अल मारी ने 53 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता। भारत के एक अन्य निशानेबाज अंकुर मित्तल इस स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश नहीं कर पाए। उन्हें क्वालिफिकेशन में नौवां स्थान हासिल हुआ। शार्दुल ने क्वालिफिकेशन में 141 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया था।

मेरठ के रहे वाले शार्दुल सुबह चार बजे उठकर घर से 150 किलोमीटर दूर दिल्ली प्रैक्टिस के लिए जाते हैं। शार्दुल के पिता बताते हैं कि क्रिकेट का शौक पूरा करने के लिए हमने उसे 6 साल की उम्र में ही विक्टोरिया पार्क भेजना शुरू कर दिया। एक साल तक प्रैक्टिस करने के बाद शार्दुल ने कहा कि मुझे फील्डिंग में सबसे पीछे खड़ा किया जाता है। बैटिंग और बॉलिंग में भी लास्ट में ही नंबर आता है। इसे जानकर मैंने उसे बैडमिंटन की कोचिंग के लिए भेजा।

बता दें कि 7 वर्ष की उम्र तक शार्दुल का रुझान शूटिंग की तरफ हो गया था। पिता राइफल एसोसिएशन के कोच वेदपाल सिंह के पास ले गए। वहां कोच ने कहा कि बच्चे की उम्र कम है और राइफल का वजन उससे भी ज्यादा, लेकिन शार्दुल ने सटीक निशाना लगाकर उनको चौंका दिया।

शार्दुल जब 14 साल के थे, तो कर्णी सिंह शूटिंग रेंज पर एक ही दिन सीनियर और जूनियर पुरुष डबल ट्रैप व्यक्तिगत और टीम इवेंट में चार गोल्ड मेडल अपने नाम कर तहलका मचा दिया, जिसके बाद उन्हें एशियन गेम्स के लिए चयनित किया गया।