Gold medal at the Doha Asian Athletics Championships: गोमती मरिमुथु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियाई एथलेटिक्स चैंपियशिप में 800 मीटर दौड़ का गोल्ड मेडल हासिल किया। भारत का इस प्रतियोगिता में यह पहला गोल्ड मेडल है। गोमती मरिमुथु के लिए यहां तक पहुंचना कतई आसान नहीं था। संघर्षों से भरी गोमती मरिमुथु की कहानी में उनके पिता का योगदान सबसे अहम रहा। गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीडिया से बात करते हुए गोमती ने इस जीत का श्रेय अपने पिता को दिया। हालांकि, बेटी की इस कामयाबी को उनके पिता नहीं देख पाए, कुछ साल पहले ही गोमती के पिता का निधन हो गया था। गोमती ने शुक्रवार को चेन्नई में मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मेरे पिता मेरे लिए सबकुछ थे, उन्हें मुझ पर यकीन था और इस वजह से वह लगातार मेरा साथ देते रहे। मैं अच्छा खान खा सकूं इस वजह से मेरे पिता जानवरों के लिए रखा खाना खाकर गुजारा कर लिया करते थे। जिस दौरान मैं इस टूर्नामेंट की तैयारी कर रही थी, उस समय मेरे पिता चल नहीं पाते थे, इसके बावजूद उन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया।’
पिता के बारे में बात करते हुए गोमती मरिमुथु की आंखों से आंसू छलक गए। उन्होंने आगे कहा, ‘अगर वो आज जिंदा होते तो मुझे गोल्ड मेडल जीतता देख बेहद खुश होते, मेरे लिए वो एक भगवान के समान थे। पिता को याद करते समय दिल आज भी भावुक हो उठता है।’ गोमती ने आगे बताया, ‘जब मैं एशियाई एथलेटिक्स चैंपियशिप की तैयारी कर रही थी तो मुझे सरकार से किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली। भारतीय टीम के कोच ने फोन के जरिए कुछ हद तक मेरी मदद करने की कोशिश जरूर की थी।’
गोमती ने आगे कहा, ‘यदि तमिलनाडु सरकार मेरी मदद को आगे आती है तो मैं ओलंपिक मेडल जीतने की पूरी कोशिश करूंगी। ओलंपिक के लिए अभी एक साल का समय बचा हुआ है और मैं इसका सही से इस्तेमाल करना चाहती हूं।’ बता दें कि भारत ने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियशिप में एक स्वर्ण, तीन रजत और पांच कांस्य पदक जीत लिए हैं। गोमती ने छठे स्थान पर पिछड़ जाने के शानदार वापसी की और गजब का फर्राटा लगाते हुए 2:02.70 के निजी सर्वश्रेष्ठ समय के साथ स्वर्ण जीत लिया। गोमती 2013 में इस प्रतियोगिता में सातवें और 2015 में चौथे स्थान पर रही थीं।


