डेनमार्क का ग्रीनलैंड इन दिनों सुर्खियों में है। वजह है अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड पर ‘कब्जा’ करने से जुड़ा बयान… डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से न सिर्फ डेनमार्क बल्कि पूरे यूरोप में हड़कंप मचा हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंंप ने गुरुवार को बयान के बाद एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका लंबे समय से चले आ रहे समझौते पर निर्भर रहने के बजाय पूरे ग्रीनलैंड का स्वामित्व चाहते हैं। ट्रंप जिस समझौते की बात कर रहे थे, उसके तहत अमेरिका को डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सहमति से वहां सैन्य अड्डे स्थापित करने के व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।
कहां है ग्रीनलैंड?
ग्रीनलैंड कहां हैं? इस पर बात करने से पहले बात करते हैं डेनमार्क पर… डेनमार्क यूरोप का एक देश है। डेनमार्क मुख्य रूप से जमीन के तीन टुकड़ों में बंटा हुआ है। पहला, डेनमार्क – जो मुख्य यूरोपीय भूमि है। इसमें जूटलैंड प्रायद्वीप और कई बड़े द्वीप (जैसे ज़ीलैंड, फ़्यून, बोर्नहोम) शामिल हैं।
दूसरा ग्रीनलैंड – यह उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक सागर के बीच स्थित दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। यह डेनमार्क राज्य का स्वायत्त (self-governing) क्षेत्र है। यह भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका का हिस्सा माना जाता है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से किंगडम ऑफ डेनमार्क का हिस्सा है। तीसरा फैरो आइलैंड्स -यह द्वीपसमूह उत्तरी अटलांटिक सागर में मौजूद है और डेनमार्क के लिए एक स्वायत्त क्षेत्र है।
ग्रीनलैंड का स्थान आर्कटिक में अत्यंत रणनीतिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह कनाडा के एक द्वीप के साथ करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। रूस, चीन और अमेरिका के बीच चल रही वर्तमान प्रतिस्पर्धा के दौर में यह स्थान और महत्वपूर्ण हो जाता है।
ग्रीनलैंड के पास प्राकृतिक संसाधन और समुद्री मार्ग हैं जिनके कारण भूमि का महत्व और भी बढ़ जाता है। ग्रीनलैंड में करीब 56,000 लोग रहते हैं। इनमें ज्यादातर इनुइट समुदाय से हैं। ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था ज्यादातर मछली पकड़ने पर निर्भर है। इसके अलावा वहां के लोगों को डेनमार्क सरकार से आर्थिक मदद के रूप में सब्सिडी मिलती है।
मुख्य डेनमार्क से कितना दूर है ग्रीनलैंड?
ग्रीनलैंड की राजधानी नूक (Nuuk) और डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन (Copenhagen) के बीच सीधी दूरी (विमान मार्ग) लगभग 3,540 किलोमीटर है। नूक (ग्रीनलैंड) और कोपेनहेगन (डेनमार्क) के बीच की दूरी तय करने में सीधी फ्लाइट के जरिए लगभग साढ़े चार से पांच घंटे का समय लगता है।
क्यों अमेरिका दिखा रहा दिलचस्पी?
वर्तमान हालातों को देखकर लगता है कि अमेरिका इस बार ग्रीनलैंड को लेकर ज्यादा सीरियस है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को ही मीडिया से बातचीत में कहा है कि यूरोपीय नेताओं को “अमेरिकी राष्ट्रपति को गंभीरता से लेना चाहिए”। जेडी वेंस ने कहा, “हम अपने यूरोपीय मित्रों से कह रहे हैं कि वे उस भूभाग की सुरक्षा को अधिक गंभीरता से लें, क्योंकि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो अमेरिका को कुछ कदम उठाने पड़ेंगे।”
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, शीत युद्ध के समय अमेरिका ने ग्रीनलैंड में परमाणु मिसाइलें लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों और डेनमार्क के विरोध के कारण यह योजना रद्द कर दी गई। ग्रीनलैंड में स्थित पिटुफ़िक स्पेस बेस (पहले थुले एयर बेस) को अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध से चला रहा है। आज यह बेस मिसाइलों पर नजर रखने का काम करता है।
हाल के वर्षों में ग्रीनलैंड के खनिज संसाधनों में दुनिया की रुचि बढ़ी है। यहां रेयर अर्थ खनिज, यूरेनियम और लोहा मिल सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां तेल और गैस भी हो सकते हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण बर्फ पिघल रही है, जिससे इन संसाधनों तक पहुंचना आसान हो सकता है।
अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड सुरक्षा के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण?
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड खनिजों के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड के आसपास रूसी और चीनी जहाज मौजूद हैं, जिससे अमेरिका की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि रूस और चीन आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य और नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। ऐसे में ग्रीनलैंड अमेरिका को इन गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित मिसाइल खतरों को समय रहते पहचानने में मदद करता है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जिससे आर्कटिक का सैन्य और रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है। अमेरिका का कहना है कि ग्रीनलैंड उसके लिए खनिजों से ज्यादा राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।
