जहां सपने अक्सर आर्थिक मजबूरियों के आगे दम तोड़ देते हैं, वहीं कुछ कहानियां ऐसी भी होती हैं जो बताती हैं कि अगर ईमानदारी से संघर्ष किया गया है तो मंजिल खुद रास्ता बनाती है। तमिलनाडु के भरत और राजेश की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक प्लम्बर और दूसरा बस कंडक्टर का बेटा। दोनों के घरों में खेल नहीं, रोजी-रोटी पहली प्राथमिकता थी।
भरत और राजेश दोनों ऐसी पृष्ठभूमि से आते हैं, जहां सपने देखना भी अक्सर लग्जरी माना जाता है। खेल उनके लिए शौक नहीं, एक जोखिम भरा चुनाव था। देर से खेल से जुड़ने के बावजूद भरत और राजेश ने हालात को बहाना नहीं बनने दिया और मेहनत, भरोसे और आपसी तालमेल के दम पर कड़ी धूप-रेत के बीच अपने सपनों को सींचते रहे।
रेत पर खेले जाने वाले इस खेल में भरत और राजेश सिर्फ गेंद से नहीं, हालात से भी जूझते रहे। हालांकि, देर से जगी लगन, परिवार का भरोसा और वर्षों की खामोश मेहनत ने उन्हें खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 में लगातार दूसरी बार रजत पदक विजेता बना दिया। भरत और राजेश ने साबित किया कि गरीबी कभी प्रतिभा की सीमा तय नहीं कर सकती।
भारत और राजेश का संघर्ष से सिल्वर और गरीबी से ग्लोरी तक का यह सफर बताता है कि आर्थिक तंगी पृष्ठभूमि हो सकती है, लेकिन जज्बे की अंतिम सीमा कभी नहीं। तमिलनाडु की बीच वॉलीबॉल जोड़ी भरत और राजेश का रिश्ता कोर्ट से कहीं आगे का है।
खेलो इंडिया ने जीता लगातार दूसरा रजत पदक
इस जोड़ी ने दीव के घोगला बीच पर खेलो इंडिया बीच गेम्स (KIBG) 2026 में लगातार दूसरा रजत पदक जीता। टीम के कप्तान भरत कहते हैं, मेरे पिताजी दिहाड़ी मजदूर के तौर पर प्लम्बिंग का काम करते हैं, जबकि राजेश के पिता बस कंडक्टर हैं। बड़े होते समय हमारे आसपास सच में कोई खेल का माहौल नहीं था, लेकिन कभी-कभी आग देर से जलती है और हमारे साथ ऐसा हमारे कॉलेज के शुरुआती दिनों में हुआ।’
अडिग रहे इरादे
चेन्नई के लोयोला कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक भरत और राजेश अपने परिवारों को सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। सीमित आमदनी और अनिश्चित भविष्य के बावजूद परिवारों ने उनके खेल करियर का खुलकर समर्थन किया। भारतीय समाज में ऐसा आमतौर पर देखने को नहीं मिलता।
भरत ने बताया, ‘हम दोनों अभी शुरुआती 20 की उम्र में हैं, लेकिन हमारे परिवारों की ओर से नौकरी करने का कोई दबाव नहीं है। अधिकतर भारतीय घरों में 23 साल के युवा से उम्मीद की जाती है कि वह तुरंत कमाने लगे। हमारी आय भले ही सीमित हो, लेकिन परिवार पूरा साथ देता है। अब हम भी धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं। उम्मीद है कि हमारे प्रदर्शन पर ध्यान दिया जाएगा।’
भरत-राजेश की जोड़ी: अनुभव और ऊर्जा का संतुलन
मैदान पर यह जोड़ी अनुभव और ऊर्जा का संतुलन पेश करती है। भरत खेलो इंडिया बीच गेम्स 2025 में तमिलनाडु की रजत पदक विजेता टीम का हिस्सा रह चुके हैं। वह टीम को स्थिरता और नेतृत्व देते हैं। राजेश अपनी फुर्ती, आक्रामकता और लगातार बेहतर होती रणनीतिक समझ के साथ इस जोड़ी को मजबूती देते हैं। दोनों तात्कालिक नतीजों से ज्यादा निरंतरता, तालमेल और दीर्घकालिक प्रगति को प्राथमिकता देते हैं।
अगला कदम एशियन चैंपियनशिप की ओर
भरत ने कहा, ‘मैं 2024 में दीव में हुए खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा था। इसके बाद पिछले साल हुए पहले खेलो इंडिया बीच गेम्स में रजत पदक जीता। इस साल भी उसी लय को बनाए रखने की खुशी है।’ हालिया प्रदर्शन ने दोनों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच के दरवाजे भी खोले हैं।
चयन ट्रायल में स्वर्ण पदक जीतकर भरत और राजेश ने अप्रैल में चीन में होने वाली एशियन बीच वॉलीबॉल चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई कर लिया है। भरत और राजेश की निगाहें अब अगले महीने लगने वाले राष्ट्रीय शिविर पर हैं, जहां दोनों को खुद को साबित करने का एक और मौका मिलेगा।
भरत और राजेश के लिए खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं रहा। यह प्रतियोगिता उनके लिए तैयारी का अहम चरण साबित हुई। इसमें उन्होंने अपने खेल को निखारा, परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाला और आने वाले कठिन सत्र के लिए मानसिक मजबूती हासिल की।
