इस्लामिक मुल्क ईरान इन दिनों जबरदस्त आर्थिक संकट के साथ ही विरोध प्रदर्शनों के दौर से गुजर रहा है। वहां महंगाई बेलगाम हो गई है और इसके विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ईरान के 31 में से 21 प्रांतों में कामकाज लगभग ठप हो गया है। ईरान में पिछले चार दिनों से लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं।
प्रदर्शन में उतरे लोग लगातार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन होना चाहिए।
सवाल यह है कि क्या वाकई ये विरोध प्रदर्शन खामेनेई की सत्ता के लिए चुनौती हैं?
‘खामेनेई मुर्दाबाद’ के नारे लगाए
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में तेहरान, शिराज, इस्फ़हान, करमानशाह और फ़ासा सहित कई शहरों में प्रदर्शन और झड़पें होती दिख रही हैं। सुरक्षा बलों के साथ झड़प के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ और ‘खामेनेई मुर्दाबाद’ के नारे लगाए हैं।
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प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर शाह मोहम्मद रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए थे। शाह मोहम्मद रजा पहलवी को 46 साल पहले ईरान की इस्लामिक क्रांति के दौरान देश छोड़कर भागना पड़ा था। तब खामेनेई के नेतृत्व में ईरान में जबरदस्त प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद ईरान की सत्ता खामेनेई के पास आ गयी थी।
शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी ने बीते साल कहा था कि इस्लामिक गणराज्य का अंत हो चुका है। रजा पहलवी ने ईरान से इस्लामिक क्रांति की जड़ों को उखाड़ने के लिए राष्ट्रव्यापी विद्रोह का आह्वान किया था। पहलवी ने कहा था कि वह ईरान में लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना के लिए तैयार हैं।
इस बीच, विरोध प्रदर्शनों के दौरान ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के एक सदस्य की मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि इससे ईरान की सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ और सख्त हो सकती है।
धार्मिक शासन के सामने खड़ी हुई चुनौती
9 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले ईरान में वित्तीय संकट और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने से इस देश के धार्मिक शासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ईरान पहले से ही इजरायल और अमेरिका द्वारा अपने परमाणु संयंत्रों पर किए गए हमलों से जूझ रहा है।
इस बीच, सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है जिसमें एक व्यक्ति तेहरान में सड़क के बीच में बेसुध बैठा हुआ दिखाई दे रहा है और मोटरसाइकिल पर सवार सुरक्षा बलों के जवान विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों को कुचलने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। इस व्यक्ति की तुलना 1989 में चीन द्वारा थियानमेन स्क्वायर पर हुए प्रदर्शनों के क्रूर दमन की तस्वीर से की जा रही है।
सरकार ने दी चेतावनी
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने जनता के गुस्से को स्वीकार किया है और कहा है कि उनकी सरकार प्रदर्शनकारियों की सही मांगों पर ध्यान देगी। सरकार ने चेतावनी दी है कि विरोध प्रदर्शन सही हैं लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या सुरक्षा को लेकर किसी खतरे का माकूल जवाब दिया जाएगा।
हालात के बिगड़ने पर मोहम्मद रजा फरज़िन ने सेंट्रल बैंक के प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने आईआरजीसी ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी को रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के उप कमांडर-इन-चीफ के रूप में नियुक्त किया है। हालात को देखते हुए तेहरान में विश्वविद्यालयों और संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
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अमेरिका क्या करेगा?
ईरान में हो रहे प्रदर्शनों पर अमेरिका की भी नजर है। अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि गिरती अर्थव्यवस्था के बीच ईरानियों का सड़कों पर उतरना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि लिए ईरानी शासन का चरमपंथ और भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। पोम्पियो ने X पर लिखा, “ईरान की जनता का गिरती अर्थव्यवस्था के विरोध में सड़कों पर उतरना कोई आश्चर्य की बात नहीं है… ईरानी शासन ने अपने चरमपंथ और भ्रष्टाचार से एक समृद्ध देश को बर्बाद कर दिया है… ईरान की जनता को एक ऐसी सरकार चाहिए जो उनके हितों की रक्षा करे – न कि मुल्लाओं और उनके साथियों के हितों की।”
ईरान को अमेरिका के दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात के दौरान ईरान पर नए हमलों की चेतावनी दी थी।
महसा अमिनी की मौत को लेकर हुआ था बवाल
साल 2022-23 में महसा अमिनी की मौत के बाद भी ईरान में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए थे। इस आंदोलन ने ईरान के इस्लामिक शासन की जड़ों को हिला दिया था। यह मामला पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था।
सवाल इस बात का है कि जिस तरह ईरान की सड़कों पर सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ खुलेआम नारेबाजी हो रही है, उससे क्या खामेनेई की सत्ता जा सकती है?
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