भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार (2 मार्च, 2024) को 195 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। उसमें 51 उत्तर प्रदेश की सीटें हैं यानी भाजपा देश के सबसे बड़े राज्य की कुल लोकसभा सीटों (80) में से आधे से ज्यादा पर उम्मीदवार उतार चुकी है।

पिछली लोकसभा चुनाव में भाजपा 78 सीटों पर लड़ी थी। दो सीट (मिर्ज़ापुर और रॉबर्ट्सगंज) सहयोगी पार्टी ‘अपना दल (सोनेलाल)’ के लिए छोड़ दिया था। दोनों पर ही अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल (एस) ने जीत दर्ज की थी।

क्या बृजभूषण सिंह का कटने वाला है टिकट?

हालिया लिस्ट में इन दोनों सीटों का जिक्र नहीं है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि अपना दल (एस) को फिर से मिर्ज़ापुर और रॉबर्ट्सगंज की सीट मिल सकती है। भाजपा ने जिन 27 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, उसमें एक चर्चित सीट कैसरगंज की है। कैसरगंज से वर्तमान में भाजपा के बृज भूषण शरण सिंह सांसद हैं।

शनिवार को भाजपा ने कैसरगंज संसदीय क्षेत्र से सटी सीटों, बाराबंकी, फैजाबाद, गोंडा और श्रावस्ती के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की, लेकिन कैसरगंज को छोड़ दिया।

पिछले साल महिला पहलवानों द्वारा बृजभूषण पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से देशभर में हंगामा मचा था। उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। एक FIR छह महिला पहलवानों की शिकायत पर दर्ज हुई थी। दूसरी FIR, एक नाबालिग पहलवान और उसके पिता की शिकायत पर दर्ज हुई थी।

कांग्रेस के रायबरेली पर संकट!

कांग्रेस के गढ़ रायबरेली से सोनिया गांधी चुनाव नहीं लड़ेगीं। पिछले चुनाव में कांग्रेस उत्तर प्रदेश की सिर्फ यही सीट जीत पायी थी। इस हाई-प्रोफाइल सीट को सोनिया गांधी द्वारा छोड़े जाने के बाद से भाजपा के शीर्ष नेता उम्मीदवार के नाम विचार कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि रायबरेली के लिए एक मजबूत उम्मीदवार की तलाश कर रही है। ऐसा उम्मीदवार जिसके जीतने की संभावना हो।

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यूपी में राज्यसभा चुनाव में भाजपा के समर्थन में क्रॉस वोटिंग करने वाले समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पांडे को रायबरेली से मैदान में उतारा जा सकता है।

आरएलडी को कौन सीट मिलने वाली है?

भाजपा ने अभी तक बागपत से उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, जहां से 2014 और 2019 में पार्टी के सत्यपाल सिंह ने जीता दर्ज की थी। सूत्रों का कहना है कि यह सीट भाजपा अपने नए सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को दे सकती है।

एक भाजपा नेता ने कहा, “मुजफ्फरनगर से केंद्रीय मंत्री संजीव कुमार बालियान को मैदान में उतारकर बीजेपी ने यह संदेश दिया है कि वह पश्चिमी यूपी में अपने जाट नेताओं का प्रभाव बनाए रखेगी और जाट वोटों के लिए आरएलडी पर निर्भर नहीं रहेगी।”

बालियान ने 2019 में आरएलडी संस्थापक अजीत सिंह को 6,526 वोटों से हराया था। बीजेपी ने हेमा मालिनी को एक बार फिर जाट बहुल सीट मथुरा से मैदान में उतारा है। सीट बंटवारे में RLD को एक और सीट मिलने की संभावना है, वह है बिजनौर। भाजपा ने सपा के गढ़ रहे मैनपुरी से भी किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, जहां भाजपा कभी नहीं जीती।

मेनका गांधी और वरुण गांधी का क्या होगा?

घोसी और गाजीपुर, भाजपा 2019 में बसपा के खिलाफ हार गई थी। इन सीटों का नाम भी सूची में नहीं है। संभावना है कि सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) को इनमें से एक सीट मिलेगी।

दो और सीटें आश्चर्यजनक रूप से सूची से गायब हैं-पीलीभीत और सुल्तानपुर। आठ बार की सांसद मेनका संजय गांधी सुल्तानपुर से मौजूदा सांसद हैं और उनके बेटे वरुण गांधी – तीन बार के सांसद – पीलीभीत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भाजपा ने सपा के गढ़ बदायूं से भी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, जहां पूर्व सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य मौजूदा सांसद हैं। शेष सीटें जहां उम्मीदवारों की घोषणा होनी बाकी है उनमें सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ, फिरोजाबाद, बरेली, कानपुर, कौशांबी, फूलपुर, इलाहाबाद, बहराईच, देवरिया, बलिया, मछलीशहर और भदोही शामिल हैं।