अमेरिका ने वेनेजुएला पर ताबड़तोड़ हमले किए और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़कर न्यूयॉर्क लाया जा रहा है। अब मादुरो और उनकी पत्नी पर अमेरिकी अदालत में मुकदमा चलेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका के सैनिकों ने कामयाब ऑपरेशन किया।

पिछले कुछ महीने से इस बात की अटकलें जोरों पर थी कि अमेरिका वेनेजुएला पर हमला करेगा और आखिरकार ऐसा ही हुआ।

निकोलस मादुरो ने बस चालक से वेनेजुएला के राष्ट्रपति बनने तक का सफर तय किया है। आइए जानते हैं कि निकोलस मादुरो कौन हैं।

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ट्रेड यूनियन के नेता थे पिता

निकोलस मादुरो का जन्म 23 नवंबर, 1962 को एक मजदूर परिवार में हुआ था और उनके पिता ट्रेड यूनियन के नेता थे। मादुरो के राजनीतिक गुरु ह्यूगो शावेज थे। 1986 में मादुरो एक साल के प्रशिक्षण के लिए क्यूबा गए थे। वापस लौटने पर मादुरो काराकस में बस चालक बने।

काराकस में वह जल्दी ही ट्रेड यूनियन के नेता बन गए। 1990 के दशक में वेनेजुएला की खुफिया एजेंसियों ने उन्हें क्यूबा सरकार से घनिष्ठ संबंध रखने वाले घोर वामपंथी के रूप में चिन्हित किया। इसके बाद मादुरो ने बस चालक की नौकरी छोड़ दी और उस राजनीतिक आंदोलन में शामिल हो गए जिसे उनके गुरु शावेज ने खड़ा किया था।

शावेज ने 1992 में सैन्य तख्तापलट का नेतृत्व किया था लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो सके थे। मादुरो ने शावेज की जेल से रिहाई के लिए अभियान चलाया था। शावेज 1998 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने थे।

मुसीबत में निकोलस मादुरो और पत्नी सिलिया फ्लोरेस

शावेज ने मादुरो को घोषित किया था उत्तराधिकारी

शावेज की तरह मादुरो ने भी अमेरिका को वेनेजुएला के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। वर्ष 2013 में अपनी मौत होने से पहले राष्ट्र को दिए गए अपने अंतिम संबोधन में शावेज ने मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।

2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद से मादुरो लगातार इस पद पर बने हुए थे। इससे पहले मादुरो देश के विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति भी रह चुके थे।

2013 में राष्ट्रपति चुने गए मादुरो

शावेज की मौत के बाद 2013 में मादुरो राष्ट्रपति चुने गए। शावेज के कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई और वेनेज़ुएला को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। देश में बेतहाशा महंगाई, भोजन और दवाइयों की भारी कमी हो गई। इसके अलावा लाखों लोग देश छोड़कर चले गए। उनके शासन में चुनावों में धांधली और विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के आरोप लगे विशेषकर 2014 और 2017 में।

अमेरिका और कई अन्य देशों ने मादुरो की सरकार पर कड़े प्रतिबंध लगाए। 2020 में अमेरिका ने उन पर भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में मुकदमा चलाया। जनवरी 2025 में मादुरो ने तीसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली।

विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने आरोप लगाया कि 2024 के चुनाव में धांधली हुई है लेकिन सरकार ने हजारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया।

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