छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने हाल में ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत 65 हजार गोबर विक्रेताओं को 5.16 करोड़ रुपये की राशि दी है। सीएम भूपेश बघेल ने यह राशि बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सुमाभाटा गांव में आयोजित ‘कृषक-सह-श्रमिक सम्मेलन- 2023’ में ट्रांसफर की। राज्‍य सरकार ने अब तक 265 करोड़ रुपए की गोबर खरीदी की है।

इस सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत राज्य के कई शीर्ष कांग्रेसी नेता शामिल हुए। राज्य सरकार ने इस दौरान ना सिर्फ गौपालकों बल्कि किसानों और मजदूरों के खाते में भी पैसा ट्रांसफर किया था। ऐसा माना जाता है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में मिली कांग्रेस पार्टी की जीत में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। ऐसे में बघेल सरकार इस बार भी किसानों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

क्या है गोधन न्याय योजना?

‘गोधन न्याय योजना’ की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण पर्व ‘हरेली’ के मौके पर 20 जुलाई, 2020 को किया गया था। हरेली पर्यावरण को समर्पित त्यौहार है। गोधन न्याय योजना राज्य के पशु मालिकों से गाय के गोबर को खरीदने की योजना है। योजना का क्रियान्वयन एक पांच सदस्यीय कैबिनेट सम‍ित‍ि करती है। यही समिति पशुपालकों और बुद्धिजीवियों के सुझाव पर गोबर की क्रय दर निर्धारित करती है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ गोबर की खरीद-बिक्री के लिए इस प्रकार की योजना की शुरू करने वाला पहला राज्य है।

घोटाले के आरोप पर सीएम ने द‍िया बीजेपी को जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर माह में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार पर गोधन न्याय योजना में भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था। रायगढ़ में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार में गरीबों का कल्याण पीछे और भ्रष्टाचार आगे है।

भाजपा का दावा है कि गोठान प्रोजेक्ट में 1300 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। हालांकि भूपेश बघेल आरोपों का खंडन करते हैं। सीएम का कहना है कि इस योजना को तीन साल हुए हैं और अब तक 265 करोड़ रुपये का गोबर खरीदा गया है। 265 करोड़ की गोबर खरीदी में 1300 करोड़ रुपये का घोटाला कैसे हो सकता है? हम डायरेक्ट ट्रांसफर कर रहे हैं। पैसा सीधे लोगों के खाते में जा रहे हैं तो ऐसे में कोई घोटाले कैसे हो सकता है।