अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी पर भीषण हमला किया और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया गया और अमेरिकी सेना उन्हें अपने साथ ले गई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ऐलान किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बनाकर अमेरिका लाया गया है।

इसके बाद दुनिया अमेरिका कि इस कार्रवाई से चकित हो गई। कुछ देशों ने इसका स्वागत किया तो कुछ देशों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। चीन और रूस ने खुले तौर अमेरिका से मादुरो को तुरंत रिहा करने को कहा और ऐसी कार्रवाई की निंदा की। इस कार्रवाई के बाद एक दिन डोनाल्ड ट्रंप न द अटलांटिक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में एक और देश पर कब्जा करनी की अपनी इच्छा दोहराई। जी हम बात कर ग्रीनलैंड की।

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने मैगजीन से कहा, हमें ग्रीनलैंड की बिल्कुल जरूरत है। हमें डिफेंस के लिए इसकी जरूरत है। इससे डेनमार्क में यह चिंता पैदा हो गई है कि डेनमार्क के ग्रीनलैंड के साथ भी ऐसा हो सकता है।

इसके अलावा, शनिवार को ट्रंप के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ और होमलैंड सिक्योरिटी एडवाइजर स्टीफन मिलर की पत्नी केटी मिलर ने ग्रीनलैंड के नक्शे पर अमेरिकी झंडे की एक तस्वीर पोस्ट की। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “जल्द ही।”

अमेरिका धमकियां देना बंद करे- डेनमार्क की प्रधानमंत्री

इसे लेकर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने रविवार को अपने एक बयान में कहा, अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जरूरत की बात करना एकदम बेतुका है। अमेरिका को डेनिश साम्राज्य के तीनों देशों में से किसी पर भी कब्जा करने का कोई अधिकार है।”

आगे उन्होंने कहा, इसलिए मैं अमेरिका से आग्रह किया कि वह ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ सहयोगी और एक अन्य देश और उसके लोगों के खिलाफ धमकियां देना बंद करें, हम बिकने वाले नहीं हैं।

ऐसे बयान गलत और अपमानजनक- ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री

इधर ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन ने रविवार को कहा, ‘जब अमेरिकी राष्ट्रपति कहते हैं कि उन्हें ग्रीनलैंड की जरूरत है और हमें वेनेजुएला और सैन्य हस्तक्षेप से जोड़ते हैं तो यह न केवल गलत है बल्कि यह अपमानजनक भी है।’

21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड का विशेष दूत बनाया , जिससे वाशिंगटन की रुचि को लेकर डेनमार्क और ग्रीनलैंड से एक बार फिर आलोचना शुरू हो गई। ट्रम्प ने कई बार डेनमार्क के स्वशासित क्षेत्र ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की वकालत की है और जेफ लैंड्री ने सार्वजनिक रूप से इसका समर्थन किया है।

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क्यों ग्रीनलैंड चाहता है अमेरिका?

बता दें कि ग्रीनलैंड खनिज-समृद्धि क्षेत्र है, यहां सोना, निकल व कोबाल्ट जैसे पारंपरिक संसाधनों के बड़े भंडार के साथ-साथ प्रेजोडियम, डिस्प्रोसियम, नियोडिमियम और टेरबियम जैसे दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (Rare Earth Minerals) के कुछ सबसे बड़े भंडार भी हैं।

यह खनिज संपदा से भरपूर आर्कटिक द्वीप में बसा देश है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रीनलैंड में 34 रेयर अर्थ मिनरल्स में से 23 मौजूद हैं। बता दें कि रेयक अर्थ मिनरल्स इलेक्ट्रिक गाड़ियों के परमानेंट मैग्नेट और विंड मिल में इस्तेमाल होता है। ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ मिनरल्स के तीन सबसे बड़े भंडार दक्षिणा गार्दार प्रांत में हैं।

बता दें कि ग्रीनलैंड के बाद ये महत्वपूर्ण खनिज चीन में भारी मात्रा में मिलते हैं और चीन ही इसके वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति के बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है। ऐसे में अमेरिका रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर चीन का दबदबा खत्म करना चाहता है और खुद भी रेयर अर्थ मिनरल्स की रेस में चैंपियन बनना चाह रहा है।

चीन की कई कंपनियां ग्रीनलैंड में खनिज क्षेत्र में निवेश में हिस्सेदारी रखती हैं, जो 11 प्रतिशत है। हालांकि इन कंपनियों में ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका भी 11 प्रतिशत से कुछ अधिक हिस्सेदारी रखते हैं।

पहले कर चुका है खरीद की पेशकश

जानकारी के मुताबिक, 1946 में पहली बार अमेरिका ने डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव रखा था। अमेरिका ने यह प्रस्ताव ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए अमेरिका और डेनमार्क के बीच 1941 के समझौते के बाद पेश किया था। हालांकि 1946 में ही डेनमार्क ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

हालांकि बाद में समझौतों के तहत अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपने सैन्य अड्डे बनाए और वहां एक परमाणु रिएक्टर और परमाणु कचरा निपटान सुविधा भी बनाई।

इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2019 में ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव दिया था।

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