वेनेजुएला में अमेरिकी हमले के बाद भारत का पहला आधिकारिक रिएक्शन सामने आ गया है। विदेश मंत्रालय ने बातचीत और कूटनीति के जरिए मामले को सुलझाने की सलाह दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि भारत वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के प्रति अपना समर्थन एक बार फिर दोहराता है। उन्होंने कहा कि भारत सभी संबंधित पक्षों से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील करता है और इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की वकालत करता है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि वेनेजुएला में मौजूद भारतीय दूतावास वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों के साथ लगातार संपर्क में है और उन्हें जिस भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता है, वह उपलब्ध कराई जा रही है।
जानकारों का मानना है कि इस मामले में भारत किसी एक देश का खुलकर समर्थन नहीं करेगा। भारत एक न्यूट्रल अप्रोच अपनाते हुए कूटनीति के जरिए संतुलन साधने की कोशिश करेगा। इसी कड़ी में विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला के आम लोगों के लिए सहानुभूति और समर्थन जरूर जताया है, लेकिन अमेरिका की कार्रवाई पर सीधी आलोचना करने से परहेज किया है।
वहीं, दुनिया के कई देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की खुलकर आलोचना की है। इनमें रूस, चीन, क्यूबा और ईरान जैसे देश शामिल हैं, जिन्होंने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के खिलाफ बताया है।
अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करने वाले देश
अर्जेंटीना और इक्वाडोर ने खुलकर अमेरिकी रुख का समर्थन किया है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियरमिलेई ने एक कदम आगे बढ़ते हुए इसे “आज़ादी जिंदाबाद” करार दिया। इक्वाडोर के राष्ट्रपति ने भी बयान देकर कहा कि अब अपराधियों का साम्राज्य ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगा।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इटली ने मादुरो की चुनावी जीत को कभी मान्यता नहीं दी और उनके शासन की आलोचना भी करता रहा है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि गलत कामों को खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई हमेशा सही रास्ता नहीं होती।
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