राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले साल में ही अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के नामांकन में लगभग 75% की गिरावट आई है। ऐसा वीज़ा के लिए कड़ी जांच, लिमिटेड इंटरव्यू स्लॉट और भविष्य में नौकरी की संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता के चलते हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगस्त-अक्टूबर के दौरान अमेरिकी विश्वविद्यालयों में होने वाले प्रवेश में आमतौर पर लगभग 70% भारतीय छात्र होते थे, इस बार सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ट्रंप प्रशासन द्वारा इमिग्रेशन पर सख्ती बरतने और कई प्रतिष्ठित स्कूलों को निशाना बनाने के बाद, इस बार अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के नामांकन में पिछले तीन सालों में पहली बार गिरावट आई है । नेशनल स्टूडेंट क्लियरिंगहाउस रिसर्च सेंटर द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में लगभग 5000 की गिरावट आई है, जबकि छात्रों की कुल संख्या में 1% की वृद्धि हुई है।
अमेरिकी स्नातक कार्यक्रमों में वीजा नामांकन में सबसे ज्यादा गिरावट
स्नातक कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जिनमें नामांकन में 6% या लगभग 10,000 छात्रों की कमी आई है जबकि साल 2020 और 2024 के बीच इसमें 50% से अधिक की वृद्धि हुई थी। गर्मियों में वीजा प्रक्रिया में विराम के बाद स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में 37% की गिरावट आई। इस नुकसान के कारण विश्वविद्यालय को अपने 10% कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी।
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भारत में काउंसलरों का कहना है कि छात्र अब अधिक सावधानी से आवेदन कर रहे हैं और केवल टॉप यूनिवर्सिटीज पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कंसल्टेंसी के आंकड़ों से पता चलता है कि सीटों की कमी के कारण कई आवेदक वीजा साक्षात्कार चरण तक नहीं पहुंच पाए। केवल वे ही आगे बढ़ पाए जिन्होंने फरवरी या मार्च तक आवेदन पूरा कर लिया था, जबकि अन्य ने अपनी योजनाएं रद्द कर दीं या प्रवेश स्थगित कर दिया।
ट्रंप प्रशासन ने पिछले 12 महीनों में एक लाख वीजा रद्द किए
ट्रंप प्रशासन ने यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं, वीजा आवेदन प्रक्रिया को जटिल बना दिया है और कैंपस कार्यकर्ताओं को निर्वासित करने की धमकी दी है। इस सप्ताह की शुरुआत में, विदेश विभाग के एक्स खाते ने दावा किया कि उसने अमेरिका को सुरक्षित रखने के अपने अभियान के तहत 8000 छात्र वीजा रद्द कर दिए हैं। अप्रैल 2025 से, भारतीय छात्रों को अधिकारियों से ईमेल मिलने शुरू हो गए थे जिनमें उन्हें सूचित किया गया कि उनका F-1 वीज़ा रद्द कर दिया गया है और उन्हें कुछ ही हफ्तों में देश छोड़ने के लिए कहा गया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले 12 महीनों में विभिन्न श्रेणियों के लगभग एक लाख वीज़ा रद्द किए गए, जिनमें ज्यादातर भारतीय नागरिक शामिल थे। निर्वासन में तेजी से वृद्धि हुई, 2025 में लगभग 3800 लोगों को निर्वासित किया गया जिनमें भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा थी।
स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में विदेशी छात्रों की संख्या में कमी
नई नीतियों का उच्च शिक्षा क्षेत्र पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा है। जहां स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में विदेशी छात्रों की संख्या में कमी आई है, वहीं स्नातक स्तर पर इसमें वृद्धि हुई है, हालांकि हाल के वर्षों की तुलना में यह वृद्धि काफी धीमी रही है। इस साल 3.2% की वृद्धि हुई है जबकि पिछले वर्ष 8.4% की वृद्धि हुई थी। कंप्यूटर और सूचना विज्ञान अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम हैं,इनमें छात्रों की संख्या में 2020 के बाद पहली बार गिरावट आई है। स्नातकोत्तर स्तर पर नामांकन में 14% और स्नातक स्तर के कार्यक्रमों में 3.6% की कमी आई है। वहीं, 2020 से 2024 तक इस क्षेत्र में 30% की वृद्धि देखी गई थी।
