अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने यूरोप और भारत के रिश्तों पर बड़ा बयान दिया है। भारत-यूरोपीय संघ ट्रेड डील की बातचीत के संभावित नतीजे से पहले स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिकी टैरिफ के कारण ही भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी तेल की खरीद में गिरावट आई। उन्होंने यूरोपीय देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि नेक बनने का दिखावा करने वाले यूरोपीय सहयोगी ऐसा करने से मना कर रहे थे क्योंकि वे भारत के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता करना चाहते थे।

पॉलिटिको के साथ एक इंटरव्यू में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, “हमने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया और भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी तेल की खरीद में गिरावट आई है। तो यह एक सफलता है। टैरिफ अभी भी लागू हैं। 25 प्रतिशत रूसी तेल टैरिफ अभी भी लागू हैं। मुझे लगता है कि इन्हें हटाने का एक कूटनीतिक रास्ता है। लेकिन यह एक बड़ी सफलता है।”

यूरोप पर अमेरिकी वित्त मंत्री का तंज

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, “मैं यह भी बताना चाहूंगा कि हमारे नेक बनने का दिखावा करने वाले यूरोपीय सहयोगियों ने ऐसा करने से मना कर दिया क्योंकि वे भारत के साथ यह बड़ा व्यापार समझौता करना चाहते थे। यूक्रेन पर हमले से पहले रूसी तेल भारत के कुल तेल आयात का सिर्फ 2-3 प्रतिशत था, लेकिन हमले के बाद भारतीय रिफाइनरियों में रूसी तेल का हिस्सा बढ़कर 18-19 प्रतिशत हो गया, जिससे भारत को भारी मुनाफा हुआ।”

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बेसेंट ने कहा कि मूर्खता की हद तो यह है कि अंदाज़ा लगाइए कि भारतीय रिफाइनरियों से रूसी तेल से बने रिफाइंड उत्पादों को कौन खरीद रहा था- यूरोपीय लोग। वे खुद के खिलाफ युद्ध को फाइनेंस कर रहे हैं।” भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के अलावा अमेरिका ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों (रोसनेफ्ट और लुकोइल) पर प्रतिबंध लगाए हैं ताकि रूस की वार मशीन को फंड देने की क्षमता को नुकसान पहुंचाया जा सके।

भारत और EU के बीच होने वाली है डील

भारत और EU पिछले छह महीनों में ट्रेड डील पर बातचीत तेजी से आगे बढ़े है। अगले हफ़्ते बातचीत खत्म करने का लक्ष्य रखा है। अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस महीने की शुरुआत में एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ‘रूस प्रतिबंध बिल’ को मंज़ूरी दे दी है, जिसमें उन देशों से आयात किए जाने वाले सभी ‘सामानों और सेवाओं’ पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है, जो रूसी यूरेनियम और पेट्रोलियम उत्पादों के जानबूझकर लेन-देन में शामिल हैं।

आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि पिछले साल अप्रैल और अक्टूबर के बीच रूस से भारत का आयात पिछले साल की तुलना में 18 प्रतिशत से ज़्यादा कम हो गया है। वहीं इस दौरान अमेरिका से भारत का आयात 62 प्रतिशत बढ़ गया है। हालांकि इसके बावजूद अमेरिका ने भारत पर कड़े टैरिफ लगाना जारी रखा है। भारत और यूरोपीय संघ ने भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने अमेरिकी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आयात के लिए एक साल का समझौता किया है। पढ़ें क्या भारत से 25 प्रतिशत टैरिफ हटाएगा अमेरिका?