पाकिस्तान ने कहा है कि सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के तहत भारत पश्चिमी नदियों पर एकतरफा किसी भी जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए अपने ‘सीमित हिस्से’ का दुरुपयोग नहीं कर सकता है।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना को भारत की मंजूरी से संबंधित एक सवाल का जवाब देते हुए साप्ताहिक प्रेस वार्ता में ये बात कही।
भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर, 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।
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भारत ने उठाया था बड़ा कदम
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा। मोदी ने कहा था कि सिंधु जल संधि को लेकर किया गया समझौता भारत को मंजूर नहीं है।
पहलगाम आतंकवादी हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 नागरिकों को मार डाला था।
विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा, ‘‘हमने चिनाब नदी पर दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना के निर्माण की भारतीय योजनाओं से संबंधित खबरें देखी हैं। जाहिर है, ये खबरें गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं क्योंकि इस परियोजना के संबंध में पाकिस्तान के साथ कोई पूर्व सूचना साझा नहीं की गई थी।’’
ताहिर हुसैन अंद्राबी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने भारत से उन परियोजनाओं के बारे में जानकारी मांगी थी जिन्हें वह शुरू करने की योजना बना रहा है।
अंद्राबी ने कहा, ‘‘सिंधु जल के लिए पाकिस्तानी आयुक्त ने भारत में अपने समकक्ष से बताई गई परियोजनाओं की प्रकृति, दायरे और तकनीकी विवरणों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है और वे यह भी जानना चाहते हैं कि क्या यह एक नयी परियोजना है, या किसी मौजूदा संयंत्र में कोई परिवर्तन या अतिरिक्त काम है।’’
अंद्राबी ने दोहराया कि आईडब्ल्यूटी एक अंतरराष्ट्रीय समझौता बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन वह अपने मूलभूत जल अधिकारों को लेकर कभी समझौता नहीं करेगा।
