उत्तरी कोरिया ने किम जोंग और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मानव अधिकारों के हनन को लेकर अमेरिकी प्रतिबंध को ‘युद्ध की घोषणा’ बताया है। उत्तरी कोरिया की आधिकारिक न्यूज एजेंसी KCNA के मुताबिक, फियोंगयांग ने कहा कि प्रतिबंधों की घाेषणा करना एक ‘घृणित अपराध’ है। अमेरिका ने बुधवार को उत्तरी कोरिया पर अधिकारों के हनन के लिए पहला प्रतिबंध लगाया था। इसके तहत किम जोंग के अलावा 10 अन्य तथा 5 मंत्रियों तथा विभागों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इस कदम का प्रभाव अमेरिकी न्यायक्षेत्र में आने वाली संपत्तियों पर पड़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून जो कि दक्षिणी कोरिया के पूर्व मंत्री भी रहे हैं, को उम्मीद हैं कि चीन अपने सहयोगी उत्तरी कोरिया से मानवाधिकारों को लेकर अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की अपील करेगा। बान के प्रवक्ता स्टीफेन दुजारिक ने गुरुवार को न्यू यॉर्क में यह बात कही। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जब उससे इस अमेरिकी कदम के बारे में पूछा गया तो उसने एकपक्षीय प्रतिबंधों का विरोध किया। चीन का तर्क है कि उत्तरी कोरिया में मानवाधिकारों की स्थिति अंतर्राष्ट्रीय शांत के लिए खतरा नहीं है।
उत्तरी कोरिया पर 2006 से अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा है। जनवरी में उत्तरी कोरिश द्वारा चौधा न्यूक्लिकर टेस्ट किए जाने के बाद मार्च में, सुरक्षा परिषद ने उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि नया अमेरिकी प्रतिबंध दिखाता है कि उत्तरी कोरिया में मानवाधिकारों पर अमेरिका का फोकस है। दक्षिणी कोरिया ने उत्तरी कोरिया पर लगाए गए अमेरिका के इन प्रतिबंधों का स्वागत किया है।

