क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो 90 साल के हो गए हैं। कास्त्रो का जन्म 13 जुलाई 1926 को पूर्वी क्यूबा के बीरन में हुआ। उनके पिता एंजेल उत्तरी स्पेन के गैलिसिया क्षेत्र से क्यूबा आए थे। यहां आने के बाद वे जमींदार बन गए थे। बताया जाता है कि गन्ने के खेतों में हैती के मजदूरों पर होने वाले अत्याचारों ने फिदेल कास्त्रो को क्रांति की ओर खींचा। कास्त्रो का पुश्तैनी मकान अब पर्यटन स्थल में बदला जा चुका है। फिदेल कास्त्रो की पढ़ाई-लिखाई हवाना यूनिवर्सिटी में हुई। यहीं पर उन्हें राष्ट्रवाद की खुराक मिली और वे 19वीं सदी के कवि और आजादी के नायक जोस मारटी के मुरीद हो गए। कास्त्रो जूलियस सीजर, नेपोलियन बोनापार्ट को भी अपना आदर्श मानते हैं।
कास्त्रो ने 1953 में भ्रष्ट तानाशाह बतिस्ता के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंक दिया। क्रांति असफल रही और उन्हें 15 साल की सजा देकर जेल में डाल दिया गया। लेकिन दो साल बाद ही उन्हें रिहा कर दिया गया। छूटने के बाद वे अपने भाई राउल के साथ निर्वासन में मैक्सिको चले गए। यहीं से रहकर उन्होंने चे ग्वेवारा के साथ मिलकर बतिस्ता के खिलाफ गुरिल्ला लड़ाई छेड़ दी। 1959 में उन्होंने बतिस्ता को खदेड़ दिया। इसी साल वे प्रधानमंत्री बन गए। बाद में 1976 में वे राष्ट्रपति बन गए। 2008 में वे इस पद से हट गए और राउल को सत्ता सौंप दी। इसी साल अप्रैल में आखिरी बार सार्वजनिक तौर पर उन्हें देखा गया तो वे काफी कमजोर नजर आए। अपने भाषण में उन्होंने एक बार भी अमेरिका का नाम नहीं लिया।
कास्त्रो शीतयुद्ध के चुनिंदा जीवित नेताओं में से एक हैं। उनके मुखिया रहते हुए क्यूबा कम्युनिस्ट राष्ट्र बन गया। क्यूबा और अमेरिका के बीच केवल 93 मील की दूर है। अमरीका ने क्यूबा से अपने तमाम कूटनीतिक रिश्ते तोड़कर उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। क्यूबा ने सोवियत संघ का हाथ थामा और अमरीका-क्यूबा के बीच अविश्वास गहराता गया। 1962 में जब तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा था तब सोवियत संघ ने अमेरिका को निशाने बनाने की तैनाती के लिए अपने मिसाइल क्यूबा भेज दिए थे। क्यूबा और अमेरिका के बीच 50 साल तक दुश्मनी रही। लेकिन हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने क्यूबा का दौरा किया था। इसे दोनों देशों के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव के अंत के रूप में देखा जा रहा है। फिदेल कास्त्रो के रहते हुए 9 अमेरिकी राष्ट्रपति और 10 भारतीय प्रधानमंत्री निकल गए।

