प्रधानमंत्री बेंजामीन नेतनयाहू ने सोमवार (20 जून) को कहा कि इस्राइल परमाणु परीक्षण को प्रतिबंधित करने के लिए संधि का समर्थन करता है लेकिन यह भी संकेत दिया कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र की संधि (सीटीबीटी) का अनुमोदन करने के लिए फिलहाल तैयार नहीं है जिसे लगभग 20 साल पहले अपनाया गया था। नेतनयाहू के कार्यालय ने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि पर एक बयान जारी किया। इससे पहले उन्होंने वियना स्थित संगठन के प्रमुख लाजीना जेरबो से मुलाकात की। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सितंबर 1996 में सीटीबीटी को स्वीकार किया था, जो सभी परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबंध लगाता है।
इस्राइल ने 1996 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अब तक इसका अनुमोदन नहीं किया है। नेतनयाहू के हवाले से जारी बयान में कहा गया है, ‘इस्राइल संधि और इसके लक्ष्यों का समर्थन करता है और इसलिए संधि पर हस्ताक्षर किए थे।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुमोदन का मुद्दा क्षेत्रीय परिस्थितियों और उपयुक्त समय पर निर्भर है। पिछले साल दुनिया के शक्तिशाली देशों और ईरान के बीच हुए परमाणु करार का इस्राइल सख्त विरोधी था। हालांकि, सीटीबीटी संगठन के कार्यकारी सचिव जेरबो ने आशा जताई है कि इस्राइल अनुमोदन की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नेतनयाहू ने उनसे कहा है कि संधि के अनुमोदन का मुद्दा ‘क्या की बजाय कब’ का है। उन्होंने बताया कि वे लोग ‘कब’ के लिए परिस्थितियों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेतनायाहू संधि के प्रति प्रतिबद्ध और सहयोगी हैं।
गौरतलब है कि सीटीबीटी पर 183 देशों ने हस्ताक्षर किए थे और रूस, फ्रांस तथा ब्रिटेन सहित 164 देशों ने इसका अनुमोदन किया है। ये तीनों देश उन नौ देशों में शामिल हैं जिनके पास परमाणु हथियार हैं या होने की बात समझी जाती है। लेकिन इस संधि को क्रियान्वित होने के लिए 44 विशेष परमाणु प्रौद्योगिकी धारक देशों द्वारा इसके अनुमोदन की जरूरत होगी। उनमें से आठ को इसका अनुमोदन करना बाकी है। परमाणु क्लब में शामिल छह देशों को इस संधि का अभी अनुमोदन करना बाकी है जिनमें अमेरिका, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इस्राइल शामिल हैं।

