वेनेजुएला में अमेरिका ने कार्रवाई करते हुए उनके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया। कार्रवाई ऐसी थी कि पूरी दुनिया हैरान है। अमेरिकी की इस कार्रवाई में उसके एक भी सैनिक को खूरोच तक नहीं आई लेकिन वेनेजुएला के दर्जनों सैनिक मर गए। इस बीच खबर आ रही है कि वेनेजुएला में रेड के दौरान अमेरिकी सेना द्वारा एक शक्तिशाली और पहले कभी न देखे गए हथियार का इस्तेमाल किया गया।

कुछ ही मिनटों में घबरा गए थे मादुरो के गार्ड

एक चश्मदीद गार्ड के सनसनीखेज बयान में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएला के सैनिकों को एक तेज आवाज जैसी शक्ति से बेअसर कर दिया गया था। इस बयान को शनिवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी ने X पर शेयर किया। इसमें बताया गया है कि कैसे वेनेजुएला के सुरक्षाकर्मी कुछ ही मिनटों में घबरा गए, क्योंकि अमेरिकी सैनिकों ने कथित तौर पर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। इसके कारण रडार सिस्टम को बंद कर दिया, पूरे इलाके में ड्रोन फैला दिए और बचाव करने वालों को खड़ा होने में असमर्थ कर दिया।

मुश्किल से 8 हेलीकॉप्टर और लगभग 20 अमेरिकी सैनिक थे- चश्मदीद

गार्ड ने कहा, “हम पहरा दे रहे थे, लेकिन अचानक बिना किसी वजह के हमारे सभी रडार सिस्टम बंद हो गए। अगली चीज़ जो हमने देखी, वह थे ड्रोन। बहुत सारे ड्रोन हमारी पोजीशन के ऊपर उड़ रहे थे। हमें समझ नहीं आ रहा था कि कैसे रिएक्ट करें।” न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार बयान में कहा गया है कि केवल एक छोटी अमेरिकी यूनिट इलाके में घुसी थी, जिसमें मुश्किल से 8 हेलीकॉप्टर थे और लगभग 20 सैनिक थे। उनकी सीमित संख्या के बावजूद गार्ड ने दावा किया कि अमेरिकियों ने जल्दी ही युद्ध के मैदान पर कब्ज़ा कर लिया। गार्ड ने कहा कि वे टेक्नोलॉजी के मामले में बहुत एडवांस्ड थे। वे ऐसे नहीं दिखते थे जिनसे हमने पहले कभी लड़ाई लड़ी हो।

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गार्ड ने इस मुठभेड़ को एकतरफा बताया और कहा कि वेनेजुएला की सेना अमेरिकी हथियारों की गति और सटीकता के सामने कमजोर पड़ गई। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “हम सैकड़ों लोग थे, लेकिन हमारे पास कोई मौका नहीं था। वे इतनी सटीकता और गति से गोली चला रहे थे, ऐसा लग रहा था कि हर सैनिक प्रति मिनट 300 राउंड फायर कर रहा था।”

‘रहस्यमयी डिवाइस’ का सेना ने किया इस्तेमाल?

गार्ड ने उस घटनाक्रम का जिक्र किया जब अमेरिकी सेना द्वारा कथित तौर पर एक रहस्यमयी डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा, “एक समय उन्होंने कुछ लॉन्च किया। मुझे नहीं पता कि इसका जिक्र कैसे करूं। यह एक बहुत तेज साउंड वेव जैसा था। अचानक मुझे लगा कि मेरा सिर अंदर से फट रहा है।”

‘सभी की नाक से अचानक बहने लगा खून’

गार्ड ने कहा कि इसके शारीरिक प्रभाव तुरंत महसूस हुए। उन्होंने कहा, “हम सभी की नाक से खून बहने लगा। कुछ लोग खून की उल्टी कर रहे थे। हम जमीन पर गिर गए, हिल भी नहीं पा रहे थे। उस सोनिक हथियार, या जो भी वह था, उसके बाद हम खड़े भी नहीं हो पाए।”

व्हाइट हाउस ने दावों पर साधी चुप्पी

व्हाइट हाउस ने इन दावों पर खड़े सवाल का जवाब नहीं दिया। वेनेजुएला के गृह मंत्रालय ने कहा है कि 3 जनवरी के ऑपरेशन में उसके सुरक्षा बलों के लगभग 100 सदस्य मारे गए। यह अभी भी साफ नहीं है कि कोई मौत कथित हथियार से जुड़ी थी या नहीं।

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डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स पर फोकस

एक पूर्व अमेरिकी इंटेलिजेंस सूत्र ने कहा कि यह घटनाक्रम डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स जैसा लगता है, जो टारगेट को बेकार करने के लिए माइक्रोवेव या लेजर जैसी फोकस्ड एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं। सूत्र ने कहा, “सेना के पास दशकों से इनके वर्जन हैं। इनमें से कुछ सिस्टम खून बहने, दर्द, जलन और काम करने में असमर्थता पैदा कर सकते हैं।” चीन पर पहले 2020 में लद्दाख में सीमा पर तनाव के दौरान भारतीय सैनिकों के खिलाफ माइक्रोवेव हथियार का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था। हालांकि चीन ने इन दावों से इनकार किया था।

वेनेजुएला के गार्ड ने कहा कि इस छापे से पूरे लैटिन अमेरिका में लोग सदमे में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी कि मेक्सिको अब लिस्ट में है। गार्ड ने कहा, “मैं किसी को भी चेतावनी दे रहा हूं जो सोचता है कि वे अमेरिका से लड़ सकते हैं। उन्हें कोई अंदाज़ा नहीं है कि वे क्या कर सकते हैं। जो मैंने देखा, उसके बाद मैं फिर कभी उस तरफ नहीं रहना चाहता। उनसे पंगा नहीं लेना चाहिए। इस रेड का असर वेनेजुएला से बाहर भी महसूस किया जा रहा है। हर कोई इसके बारे में बात कर रहा है। यहां जो हुआ है, वह बहुत सी चीजें बदलने वाला है, न सिर्फ वेनेजुएला में, बल्कि पूरे क्षेत्र में।”