नरेंद्र मोदी सरकार 2019 के चुनाव (जो 2018 के अंत में भी हो सकते हैं) की तैयारियों में जुट गई है। इसके लिए बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। बताया जाता है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने एक गुप्त बैठक की। इसमें अमित शाह ने देश भ्रमण के दौरान महसूस की गई जनभावना का अपना आकलन प्रधानमंत्री के साथ साझा किया। सूत्र बताते हैं कि शाह का आकलन सुन पीएम मोदी परेशान हो गए। उन्हें बताया गया कि खाते में 15 लाख रुपए डालने का 2014 चुनाव के समय किया गया वादा जनता अब तक नहीं भूली है, बल्कि वह पैसे आने का इंतजार कर रही है। कई लोगों ने इसी उम्मीद में खाता खुलवा लिया है। लेकिन खाता खुलवाने के कई महीने बाद भी पैसे नहीं आने से उनकी नाराजगी आक्रोश में बदलने वाली है।
मोदी-शाह की गुप्त बैठक पर नजर रखने वाले एक खुफिया सूत्र के मुताबिक दोनों नेताओं ने इस समस्या की जड़ में बाबा रामदेव को देखा। आपसी चर्चा में दोनों नेताओं ने कहा कि विदेश में जमा काला धन वापस लेने को रामदेव के दबाव के चलते ही पिछले चुनाव में मुद्दा बनाया गया था और इसी कड़ी में लोगों को एक आकलन दिया गया था कि अगर काला धन वापस आ गया तो हर भारतीय के हिस्से 15 लाख रुपए आएंगे। नेताओं ने माना कि उन्हें इस बात का अहसास नहीं था कि जनता इस मामूली गणित को वादा मान लेगी और दिल से लगा बैठेगी। पर, अब मामले की गंभीरता को देखते हुए जनता का आक्रोश शांत करने के उपाय पर चर्चा जरूरी माना गया।
बताया जाता है कि अमित शाह ने प्रधानमंत्री को सुझाव दिया कि जिसके चलते समस्या पैदा हुई है, उसे ही समाधान का जरिया भी बनाया जाए। यानी बाबा रामदेव के भरोसे ही इस मसले का हल निकालने के विकल्प पर विचार किया गया। सूत्र बताते हैं कि शाह ने सुझाव दिया कि क्यों न बाबा रामदेव की पतंजलि को बैंकिंग लाइसेंस दे दिया जाए और जनधन खाते की तरह पतंजलि बैंक खाता खुलवाने की अनिवार्यता रख दी जाए। यह शर्त रखते हुए कि विदेश से आया कालाधन पूर्ण स्वदेशी खाते में ही रखा जाना चाहिए। शाह के मुताबिक इस प्रस्ताव पर बाबा रामदेेेव को भी आपत्त्िा नहीं होनी चाहिए और इस पर अमल उतना आसान भी नहीं होने दिया जाएगा। इस तरह लोग गुस्सा भी नहीं होंगे और भाजपा को वोट देकर एक बार फिर चुनाव जिता देंगे। संभव है कि पहले से ज्यादा वोटों से जिताएं।
सूत्र का कहना है कि प्रथम दृष्टया पीएम मोदी को अपने ”चाणक्य” अमित शाह का यह प्रस्ताव पसंद आया है। इस पर आगे की चर्चा के लिए उन्होंने एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। इसके बाद की बैठक में रामदेव की राय जानने के लिए उन्हें भी शामिल किया जाएगा।
(नोटः इस खबर का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। यह खबर सिर्फ आपको हंसाने के लिए लिखी गई है।)

