भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र ने जिस तेजी से अपना विस्तार किया है, उसका परिणाम यह हुआ है कि अब दूसरे देश भी मानने लगे हैं कि चिकित्सा के क्षेत्र में भारत दुनिया के कई प्रमुख देशों की तुलना में न केवल बेहतर है बल्कि सस्ता भी है। इसीलिए आज न सिर्फ मध्य-पूर्व के देशों के लोगों की भीड़ अपने देश के अस्पतालों में बढ़ती जा रही है, बल्कि ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों के लोग भी ईलाज सस्ता होने के कारण अब भारत आने लगे हैं।
यही कारण है कि चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार नौकरियों के अवसर बढ़ रहे हैं। फिर चाहे आप दसवीं पास हो या बारहवीं। इस क्षेत्र में सभी के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार है :
चिकित्सक : भारत में चिकित्सक या डॉक्टर का पेशा भगवान के बराबर माना जाता है। यह पेशा विशेषज्ञता पर आधारित होता है। मसलन कोई आंख, नाक और गले का डॉक्टर होता हैं तो कोई हृदय का, कोई हड्डी का डॉक्टर होता है। इस विशेषज्ञता को प्राप्त करने के लिए एमबीबीएस, एमडी या एमएस की डिग्री प्राप्त करनी होती है। कुछ लोग इससे भी अधिक डिग्री प्राप्त करते हैं और पीएचडी तक करते हैं। एक औसत डॉक्टर का वेतन कम से कम एक लाख से प्रारंभ होकर के करोड़ों रुपए तक होता है। कई बार तो एक अच्छा डॉक्टर एक आॅपरेशन के डेढ़ लाख से लेकर पांच लाख रूपए तक ले लेता है।
चिकित्सा सहायक : चिकित्सा सहायक वह व्यक्ति होता है जो डॉक्टर के कार्यालय या अस्पताल में प्रशासनिक कार्यों को पूरा करता है। चिकित्सा सहायक जैसी नौकरियों की मांग अपने देश में लगातार बढ़ रही हैं। इनका प्रारंभिक वेतन 25,000 से लेकर एक लाख रुपए तक हो सकता है। इसके लिए आपको किसी अच्छे संस्थान से चिकित्सा प्रशासन में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम करना होगा।
नर्सिंग सहायक : एक पंजीकृत नर्स या लाइसेंस प्राप्त व्यावसायिक नर्स के रूप में काम करने के लिए सक्षम व्यक्ति को नर्सिंग सहायक कहते हैं। चिकित्सा उपकरण के रखरखाव, उपयोग स्पंज स्नान से लेकर दवाई और इंजेक्शन तक देने की जिम्मेदारी इन्हीें की होती है। कई नर्स सहायक सेवानिवृत्ति और बुजुर्ग रोगियों के घरों में भी काम करते हैं। इसके लिए उन्हें नर्सिंग में स्नातक का पाठ्यक्रम करना होता है। इनका प्रारंभिक वेतन 20,000 से लेकर एक लाख रुपए तक होता है।
प्रयोगशाला तकनीशियन : प्रयोगशाला तकनीशियन, जिसे आमतौर पर लैब असिस्टेंट के रूप में जाना जाता है, एक चिकित्सा प्रयोगशाला में कई प्रकार के परीक्षण करते हैं। वे प्रयोगशाला में उपयोग करने के लिए तरल पदार्थ और ऊतकों के नमूने एकत्र करते हैं। और फिर वे चिकित्सकों और सर्जनों का आकलन करने के लिए आंकड़े प्रदान करने के लिए परीक्षण करते हैं। इसके लिए वह इस पेशे से जुड़ी उच्च डिग्री हासिल करते हंै। इसको करने के बाद वे एक प्रशिक्षित लैब असिस्टेंट बन सकते हैं। इनका प्रारंभिक वेतन 20,000 से लेकर 60,000 रुपए तक हो सकता है। इनके अलावा भी चिकित्सा जगत में कई अवसर उपलब्ध हैं।
फार्मेसी तकनीशियन : फार्मेसी तकनीशियन का मुख्य काम डॉक्टरों की बताई दवाइयों को मरीजों को समझाना और देना होता है। इसलिए सबसे पहले उन्हें दवा के नाम और उपयोग को समझना चाहिए। उनके पास दवा को निर्धारित करने या एक रोगी द्वारा ली जाने वाली अन्य दवाओं के साथ दवा की संगतता का आकलन करने के लिए पर्याप्त शिक्षा होनी चाहिए। इसके लिए एक संबंधित व्यक्ति को फार्मेसी में डिप्लोमा या सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम करना होता है।
प्रारंभिक वेतन 20,000 से 50,000 रुपए तक हो सकता है।
डायग्नोस्टिक मेडिकल सोनोग्राफर : किसी भी अस्पताल में डायग्नोसिस चिकित्सा सोनोग्राफर या डीएमएस वह व्यक्ति होता है जो अस्पताल, क्लिनिक या चिकित्सक के कार्यालय में इमेजिंग मशीनों के संचालन के लिए जिम्मेदार है। एक सोनोग्राफर अल्ट्रासाउंड, सोनोग्राम, इकोकार्डियोग्राम या इसी तरह के उपकरण का संचालन करेगा जो छवियों को बनाने के लिए किसी व्यक्ति के शरीर में तरंगों को निष्पादित करता है। इस व्यक्ति को छवियों का आकलन करने और उनके माध्यम से रोगियों की बीमारी बताने की जिम्मेदारी होती है। इसका भी कई बड़े संस्थानों में पाठ्यक्रम होता है। सोनोग्राफर का प्रारंभिक वेतन 25,000 से लेकर 50,000 रुपए तक होता है।
योग्यता : यदि आप 10+2 भौतिक विज्ञान, रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान विषय से पास हैं तो इस क्षेत्र में जा सकते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में अनेक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। एलोपैथी पद्धति में फिजिशियन या सर्जन बनना चाहते है तो एमबीबीएस में प्रवेश और उसके बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करनी होती है। आयुर्वेद या यूनानी पद्धतियों में बीएएमएस या बीयूएमएस करने के बाद वैद्य या हकीम बन सकते हैं।
– संजय सिंह बघेल
(शिक्षक, दिल्ली विश्वविद्यालय)
