कान दर्द, खुजली और सायं-सायं जैसी आवाज़ें कई कारणों से होती हैं और ये समस्या अचानक भी शुरू हो सकती है। कान दर्द अक्सर कान में बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन, ईयरवैक्स के ज्यादा जमा होने, ठंडी हवा लगने या गला-नाक की किसी इंफेक्शन के कारण बढ़ जाता है। जब मैल सख्त होकर कान की नलिका पर दबाव डालता है तो तेज दर्द और भारीपन महसूस होता है। कान में खुजली का सबसे आम कारण होता है earwax यानी कान के मेल का सूख जाना, जिससे कान की स्किन खिंचने लगती है। नमी की वजह से फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है, जो लगातार खुजली करता है।

 कुछ लोगों में हेडफोन, ईयरबड्स या धूल-मिट्टी से एलर्जी भी खुजली का कारण बनती है। वहीं कान में सायं-सायं या घूं-घूं की आवाज़ (tinnitus) तब सुनाई देती है जब कान में मैल ब्लॉकेज बना लेता है, ईयरड्रम में सूजन आ जाती है, लंबे समय तक तेज आवाज़ में रहने से नसें कमजोर हो जाती हैं या फिर हाई बीपी और तनाव के कारण नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है। विटामिन B12 की कमी भी tinnitus का एक बड़ा कारण है। यह सारी समस्याएं छोटी लगती हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर ये गंभीर रूप ले सकती हैं।

कान में होने वाली इन सभी परेशानियों का आप घर में ही देसी इलाज कर सकते हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण ने बताया अगर आप कान के दर्द से परेशान हैं, कान में खुजली होती है और सांय सांय जैसी आवाज आती है तो आप मूली के तेल का इस्तेमाल करें। मूली सिर्फ एक सब्जी नहीं बल्कि अनेक रोगों की प्राकृतिक औषधि है। कान की परेशानी का इलाज करने के लिए आप मूली को उसके पत्तों के साथ इस्तेमाल कर तेल तैयार करें। ये तेल कान दर्द, खुजली, सायं-सायं की आवाज़ (टिनिटस जैसी समस्या) में असरदार साबित होगा।  यह तेल 2–3 बूंद रात में डालना फायदेमंद माना गया है।

मूली का तेल कान दर्द में कैसे करता है असर?

मूली का तेल एक पारंपरिक आयुर्वेदिक उपाय है जो कान दर्द, खुजली और सायं-सायं जैसी आवाज़ की समस्या में राहत देता है। मूली में मौजूद प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल गुण कान के भीतर सूजन को कम करते हैं और बैक्टीरिया या फंगल संक्रमण को रोकने में मदद करते हैं। जब मूली के रस को सरसों के तेल के साथ पकाया जाता है, तो सरसों का गर्म तासीर वाला गुण और मूली के औषधीय तत्व मिलकर एक शक्तिशाली हर्बल तेल बनाते हैं, जो कान में जमी गंदगी, नमी और संक्रमण की वजह से होने वाले दर्द को शांत करता है।

यह तेल कान की सूखी त्वचा को मॉइस्चर देता है, जिससे खुजली में आराम मिलता है, और कान की नसों को गर्माहट देकर सायं-सायं जैसी आवाज़ को भी कम करता है। इसकी कुछ बूंदें रात में डालने से कान को प्राकृतिक हीलिंग मिलती है और दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है।

कान दर्द, खुजली और सायं-सायं की आवाज़ के लिए मूली का तेल कैसे तैयार करें

सामग्री:

  • मूली और मूली की पत्तियों का रस – 200 ग्राम
  • सरसों का तेल – 50 ग्राम

विधि:

  • सबसे पहले 200 ग्राम मूली और पत्तियों का रस निकालें।
  • एक कड़ाही में 50 ग्राम सरसों का तेल गर्म करें।
  • तेल हल्का गर्म होने लगे तो उसमें मूली का रस डाल दें।
  • अब इसे धीमी आंच पर पकाएं, जब तक सारा रस पककर उड़ न जाए और केवल तेल न रह जाए।
  • तैयार तेल को छानकर कांच की शीशी में भरकर रख लें।

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