Kadha Side Effects: वैश्विक महामारी बनकर उभरे कोरोना वायरस के इस दौर में हर कोई अपनी सेहत के प्रति सचेत रहने लगा है। इस खतरनाक वायरस का इलाज विश्व के अलग-अलग हिस्सों में वैज्ञानिक ढूंढ़ने में जुटे हुए हैं। अब तक के अध्ययनों से इस बात का खुलासा हुआ है कि ये एक ऑटो-इम्युन डिजीज है। इसके मतलब है कि जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है उन्हें इस वायरस से संक्रमित होने का खतरा अधिक है। ऐसे में इस कोरोना काल में हर कोई अपनी इम्युनिटी को बढ़ाने की तमाम कोशिश कर रहा है। इस दौरान जिस इम्युनिटी बूस्टर ड्रिंक का ज्यादातर लोग सेवन कर रहे हैं, वो है काढ़ा। हालांकि, लौंग, अदरक, दालचीनी और तुलसी जैसी आयुर्वेदिक औषधियों से बनाए गए काढ़े को गलत ढ़ंग से पीने से आप कई दूसरे स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार हो सकते हैं-
सोशल मीडिया के सहारे गलत तरीके से बना रहे हैं लोग काढ़ा: सोशल मीडिया के जमाने में लोग हर चीज के लिए इंटरनेट का सहारा लेते हैं। काढ़ा बनाने के लिए भी लोग डिजिटल माध्यम का यूज कर रहे हैं। इंटरनेट से रेसिपी जानकर घर में ही काढ़ा बनाकर पी रहे हैं। हालांकि, इंटरनेट पर सोर्स प्रमाणिक हो ये जरूरी नहीं और इसी कारण कई लोग गलत तरीके से बने काढ़ा का सेवन कर रहे हैं जिस कारण उन्हें कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से रुबरु होना पड़ रहा है।
काढ़े के गर्म तासीर से बढ़ती है परेशानी: काढ़ा बनाने में जिन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, वो सभी गर्म तासीर की होती हैं। इनके अधिक या गलत सेवन से शरीर में गर्मी बढ़ जाती है जिसकी वजह से कई स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती हैं। कुछ लोगों को इस कारण मुंह में छाले, एसिडिटी, गले में जलन की शिकायत हो सकती है। वहीं, काली मिर्च और दालचीनी के अधिक सेवन से पेट में दर्द हो सकता है। गिलोय, मुलेठी और अश्वगंधा जैसी आयुर्वेदिक औषधि के ओवरडोज से जॉन्डिस तक का खतरा हो सकता है।
सही अनुपात है जरूरी: हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार हल्दी, अदरक, दालचीनी और काली मिर्च इम्युनिटी को बढ़ाने में मददगार जरूर हैं लेकिन इनके अधिक सेवन से सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। ऐसे में हर सामग्री को सही अनुपात में इस्तेमाल करना जरूरी है। अगर आपको लगे कि जो काढ़ा आपने बनाया है वो आपके स्वास्थ्य को सूट नहीं कर रहा है तो आप इसमें दालचीनी, काली मिर्च, अश्वगंधा और सोंठ की मात्रा कम कर सकते हैं।
