आमतौर पर सजने-संवरने का एक अहम हिस्सा नाखून की देखभाल भी होती है। काटने से लेकर रंगने तक, लोग इन्हें खूबसूरत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। हालांकि, ये सिर्फ किसी की पर्सनैलिटी बेहतर करने में ही नहीं, बल्कि किसी बीमारी से बचाने में भी मददगार है। दरअसल, कैरोटिन नामक पोषक तत्व नाखूनों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। जब बॉडी में इस न्यूट्रिएंट की कमी हो जाती है तो नाखूनों का रंग (Nail Disorder) बदल जाता है और उसकी गुणवत्ता बद्तर होते जाती है। ऐसे में नाखूनों को नजरअंदाज करना आपके संपूर्ण सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
नाखून के रंगों से जानिये स्वास्थ्य का हाल: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार फंगल इंफेक्शन के कारण नाखून पीले पड़ सकते हैं। इसके अलावा, नाखूनों का पीलापन डायबिटीज, थायरॉयड, लिवर सोरायसिस, फेफड़ों की समस्या की ओर भी संकेत करता है। नाखून अगर अचानक सफेद पड़ने लगे तो ये लिवर की परेशानी की ओर इशारा करते हैं। वहीं, शरीर में खून की कमी होने से भी नाखून सफेद पड़ने लगते हैं।
खतरनाक हो सकता है नाखून का नीला पड़ना: शरीर में ऑक्सीजन की कमी की वजह से नाखूनों का रंग नीला होने लगता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार फेफड़े व दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण भी उंगलियां नीली पड़ने लगती हैं। जबकि शरीर के किसी अंग में अगर सूजन की समस्या रहती है, तो इससे नाखून लाल हो जाते हैं।
इंफेक्शन की ओर इशारा करते हैं ऐसे नाखून: नाखूनों में संक्रमण की समस्या होने पर ये भुरभुरे हो जाते हैं। उनका आकार भी बिगड़ जाता है। इस कारण लोगों को सूजन और दर्द की भी शिकायत होती है। बता दें कि कई बार संक्रमित त्वचा पर नाखूनों से खुजलाने की वजह से तो कभी ज्यादा देर तक जूते पहनने के कारण नाखून में इंफेक्शन हो सकता है।
डार्क लाइन क्यों आते हैं: स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि नाखूनों पर डार्क लाइन स्किन कैंसर का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से तुरंत दिखाएं।
कैसे रखें नाखूनों का ध्यान: जो लोग अपने नाखून को सजाने के शौकीन होते हैं, उन्हें अपने नेल्स पर उन उत्पादों का इस्तेमाल करना चाहिए जिनमें बैक्टीरिया न हो। संक्रमित नाखूनों पर नेल पॉलिश लगाने से बचें।
