विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक टीबी आज भी दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी दस वजहों में से एक है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले 2016 में ही तकरीबन 1.8 मिलियन लोगों की टीबी से मौत हो गई। टीबी से मौत के तकरीबन 95 प्रतिशत मामले कम और मध्यम आय वाले देशों में देखे गए हैं। टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। इसके तमाम उपचार अब मेडिकल साइंस में मौजूद हैं। टीबी से लड़ने में सरकार द्वारा संचालित कई तरह की योजनाएं बहुत मदद कर रही हैं। यह सच है कि टीबी को लेकर आज लोगों में काफी जागरूकता आई है लेकिन इसे लेकर तमाम भ्रांतिया आज भी लोगों के दिमाग में हैं। इस वजह से टीबी से मुक्त भारत के अभियान में बाधा पहुंचती है। आज हम टीबी से जुड़ी ऐसी ही कुछ भ्रांतियों की सच्चाई के बारे में आपको बताने वाले हैं।
1. टीबी आनुवंशिक होता है – यह पूरी तरह से गलत धारणा है। टीबी एक संक्रामक बीमारी है। रोगी के खांसने से, छींकने से या ऐसी किसी भी गतिविधि से जिसमें बैक्टीरिया का आदान प्रदान हो टीबी फैल सकती है। टीबी आनुवंशिक नहीं होती।
2. यह केवल निम्न आर्थिक-सामाजिक स्थिति वालों को होती है – टीबी किसी को भी हो सकती है। यह आयु, वर्ग या आर्थिक स्थिति को देखकर नहीं होती। निम्न आर्थिक स्थिति वाले लोगों के पोषक तत्वों के कम अवशोषण की वजह से उनमें रोग-प्रतिरोधक क्षमता की कमी होती है। इस वजह से ज्यादातर मामलों में टीबी निम्न आर्थिक-सामाजिक स्थिति वाले लोगों को होती है।
3. धूम्रपान से टीबी होता है – टीबी के संक्रमण का कारण माइक्रोबैक्टीरियल ट्यूबरक्यूलोसिस है। धूम्रपान से टीबी नहीं होता। हां, यह टीबी की समस्या को बढ़ा सकता है और इससे इंफासेमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़े के कैंसर जैसी समस्याएं होती हैं।
4. टीबी लाइलाज है – टीबी का अब पूरी तरह से इलाज किया जा सकता है। इसका ट्रीटमेंट थोड़ा समय लेता है लेकिन दवाओं से इसे पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। इलाज में यह अन्य बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स के इलाज से ज्यादा समय लेता है। उपचार प्रक्रिया के लंबा होने की वजह से कई लोग इसका इलाज बीच में ही रोक देते हैं। उन्हें ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

