सुशील राघव  

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली के पूर्व छात्रों की स्टार्टअप कंपनी ने एक नेजल (नाक पर लगाए जाने वाला) फिल्टर विकसित किया है, जो लोगों को वायु प्रदूषण से बचाने के साथ-साथ सांस की बीमारियों की आशंका को भी कम करेगा। ‘नेसोफिल्टर्स’ नाम का यह फिल्टर दिल्ली-एनसीआर में दो महीने के अंदर मात्र दस रुपए में उपलब्ध होगा।  इस फिल्टर को विकसित करने वाली ‘नैनोक्लीन ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक शर्मा, जिन्होंने साल 2015 में आइआइटी से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था, ने बताया कि हमने इस फिल्टर को 100 फीसद जैविक रूप से विघटित होने वाले पदार्थ से बनाया है। यह फिल्टर वायु में मौजूद बेहद महीन कणों (पीएम 2.5), बैक्टीरिया और फूलों के पराग से लोगों को सुरक्षित रखेगा।
फिल्टर को उपयोग व फेंकने की पद्धति पर एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इस कंपनी में प्रतीक के अलावा 1982 बैच के संजीव जैन, तुषार व्यास (मैकेनिकल इंजीनियरिंग, 2015) और एक वर्तमान छात्र जतिन केवलानी शामिल हैं।

यह टीम आइआइटी की प्रोफेसर मंजीत जस्सल और प्रोफेसर अश्विनी अग्रवाल के निर्देशन में काम कर रही है। प्रोफेसर अग्रवाल के मुताबिक, इस फिल्टर में लाखों महीन छेद बनाए गए हैं ताकि वायु में मौजूद प्रदूषण के कणों को नाक में जाने से रोका जा सके। बिना किसी परेशानी के इसे लंबे समय तक उपयोग किया जा सकता है। उनके मुताबिक, यह फिल्टर विभिन्न प्रकार की एलर्जी से ग्रसित और लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में काम करने वाले लोगों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा। फिल्टर बनाने वाली कंपनी को 11 मई को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों ‘स्टार्टअप नेशनल अवॉर्ड 2017’ भी मिल चुका है। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से यह पुरस्कार दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया गया था, जिसमें केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्षवर्धन भी मौजूद थे।