पेट की गर्मी एक बहुत आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। इसमें व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है जैसे पेट के अंदर जलन या आग-सी जल रही हो। यह बेचैनी, जलन और असहजता कई बार इतनी ज्यादा होती है कि इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल हो जाता है। पेट की गर्मी की वजह से बॉडी में कई तरह के लक्षण दिखते हैं। पेट की गर्मी की वजह से ही मुंह में छालें आते हैं। गलत खानपान, अनियमित दिनचर्या और बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल पेट की गर्मी बढ़ने के मुख्य कारण माने जाते हैं। दरअसल, जब हमारा पाचन तंत्र जरूरत से ज्यादा मेहनत करने लगता है, तो शरीर के अंदर अतिरिक्त गर्मी पैदा होती है। देर से खाना, भारी और मसालेदार भोजन, खाने के तुरंत बाद लेट जाना या शारीरिक गतिविधि की कमी पाचन को और ज्यादा बोझिल बना देती है।

मेडिकल भाषा में इसे अत्यधिक एसिड बनने यानी हाइपर एसिडिटी और गैस्ट्राइटिस से जोड़ा जाता है। वहीं आयुर्वेद के अनुसार शरीर में मौजूद तीन दोष वात, पित्त और कफ में से जब पित्त दोष असंतुलित होकर बढ़ जाता है, तो पेट में गर्मी, जलन और अपच जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक पेट की गर्मी को कंट्रोल करने के लिए हमेशा महंगी दवाइयों या सिरप की जरूरत नहीं होती। किचन में मौजूद कुछ साधारण चीजों से बना एक आयुर्वेदिक नुस्खा इस समस्या में बेहद कारगर साबित हो सकता है। इस नुस्खे में जीरा, धनिया और सौंफ का इस्तेमाल किया जाता है। ये तीनों मसाले मिलकर पाचन तंत्र को ठंडक पहुंचाते हैं और पेट की अतिरिक्त गर्मी को शांत करते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कैसे ये नुस्खा पेट के लिए अमृत साबित होता है।

जीरा और पाचन एंजाइम्स का कनेक्शन

Middle East Journal of Digestive Diseases में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार जीरा ‘लिपेज’ और ‘प्रोटीज’ जैसे पाचक एंजाइम्स के स्राव को बढ़ाता है। यह भोजन को तेजी से तोड़ता है, जिससे वह पेट में सड़ता नहीं है और गैस या एसिडिटी पैदा नहीं होती।

धनिया और पित्त संतुलन

Journal of Ethnopharmacology के मुताबिक, धनिया के बीजों में ‘लिनालूल’ (Linalool) होता है। यह एक एंटी-स्पास्मोडिक एजेंट के रूप में काम करता है, जो पाचन तंत्र की मांसपेशियों को आराम देता है। इसकी ठंडी तासीर (Cooling properties) पेट की दीवारों की जलन को कम करती है।

सौंफ और एंटासिड गुण

रिसर्च के अनुसार सौंफ में ‘एनेथोल'(Anethole) नामक सक्रिय तत्व होता है। यह पेट में इन्फ्लेमेशन (सूजन) को कम करता है और पेट की एसिडिटी को सोखने वाले नेचुरल एंटासिड की तरह व्यवहार करता है। यह ब्लोटिंग को कम करने में सबसे प्रभावी माना गया है।

मिश्री और सौंफ भी करें शामिल

इस खास नुस्खे में जीरा, धनिया और सौंफ के साथ पुदीना और मिश्री भी मिलाई जा सकती है, जिससे इसकी प्रभावशीलता और बढ़ जाती है। जीरा पाचन एंजाइम को सक्रिय करता है और गैस से राहत दिलाता है। धनिया में ठंडी तासीर होती है, जो एसिडिटी और जलन को कम करता है। सौंफ एक नेचुरल एंटासिड की तरह काम करती है और ब्लोटिंग से राहत देती है। पुदीना पेट को ठंडक देता है, जबकि मिश्री शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करती है।

डॉक्टर के अनुसार सेवन का सही तरीका

1 चम्मच जीरा, 1 चम्मच खड़ा धनिया और 1 चम्मच सौंफ को 2 कप पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो इसमें कुछ पुदीने की पत्तियां डालें और 2–3 मिनट और पकाएं।  इसे छानकर गुनगुना पिएं। नियमित सेवन से पेट की गर्मी में पहले ही दिन से राहत महसूस हो सकती है।

इन चीजों से करें परहेज

इस नुस्खे के साथ-साथ मसालेदार और तली-भुनी चीजों से परहेज करें। चाय, कॉफी, शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं। हरी सब्जियां, ताजे फल और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। रोजाना 7–8 घंटे की अच्छी नींद और हल्की फिजिकल एक्टिविटी भी पाचन को दुरुस्त रखने में मदद करती है।

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