आंखें शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। आंखों के श्रृंगार के लिए काजल का इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है। काजल के इस्तेमाल से आंखें बड़ी और खूबसूरत दिखाई देती हैं। इसके अलावा काजल का औषधीय महत्व भी है। काजल आंखों को ठंडक भी पहुंचाता है और दृष्टि क्षमता में वृद्धि भी करता है। पहले के समय में काजल घरों में ही तैयार किया जाता था। आज भी कई घरों में काजल प्राकृतिक विधि से बनाए जाते हैं लेकिन फिर भी केमिकल्स की सहायता से बनाए गए काजल का उपयोग भी काफी बढ़ा है।
घर पर बने काजल में केमिकल्स आदि का इस्तेमाल नहीं किया जाता इसलिए इस तरह के काजल आंखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ये काजल कम लागत में घर पर ही बनाए जाते हैं। प्राकृतिक तत्वों से निर्मित होने के कारण ये न सिर्फ सौंदर्य प्रसाधन के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं बल्कि आंखों की औषधि के लिए भी इनका प्रयोग किया जाता है। इन्हें बनाने का तरीका भी बहुत कठिन नहीं है। थोड़ा सा समय देकर इन्हें आसानी से बनाया जा सकता है। बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त काजल से आंखों में संक्रमण का खतरा हो सकता है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार बाजार में मिलने वाले काजल में भारी मात्रा में लेड होता है। यह बच्चों के लिए काफी खतरनाक होता है। इसकी वजह से एनीमिया, किडनी की समस्याएं और न्यूमेरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं।
खराब काजल के अधिक प्रयोग से मौत तक हो सकती है। इसलिए घर के बने काजल का उपयोग आंखो की सेहत के लिए अच्छा और सुरक्षित है। इसे घर पर बनाने के लिए सूत की बत्ती वाले एक दिए में सरसो का तेल डालकर जलाया जाता है। इसके बाद इसकी लौ पर तांबे की एक प्लेट को पूरी रात के लिए रख दिया जाता है। सुबह प्लेट पर जमी कालिख को खुरचकर उसे किसी डिब्बे में रख लिया जाता है। अब देशी घी की कुछ बूंद उसमें डालकर उसका पेस्ट तैयार कर लिया जाता है। फिर आप इसका इस्तेमाल अपनी आंखों के लिए कर सकते हैं। काजल का भारत में धार्मिक महत्व भी है। यह बुरी आत्माओं तथा बुरी नजरों से लोगों को बचाने के एक टोटके की तरह भी इस्तेमाल किया जाता है। इसका सबसे अधिक प्रयोग भारत और अफ्रीका के लोग करते हैं।![]()

