आजकल युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले भी हार्ट अटैक होते थे लेकिन उम्र बढ़ने पर, लेकिन आज कम उम्र में ही युवा इसके शिकार हो रहे हैं। हार्ट अटैक तब होता है जब दिल की कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज के कारण हार्ट मसल तक खून की सप्लाई अचानक बंद हो जाती है। आमतौर पर ये ब्लॉकेज धीरे-धीरे बढ़ती है और जब 80–90 प्रतिशत तक पहुंचती है, तब हार्ट अटैक का खतरा होता है। लेकिन अब डॉक्टर देख रहे हैं कि 40–60 प्रतिशत ब्लॉकेज पर ही युवाओं को अचानक हार्ट अटैक हो रहा है। कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि आज की लाइफस्टाइल और शरीर में हो रहे अंदरूनी बदलाव इसकी बड़ी वजह बन रहे हैं।

एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर और प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट  डॉक्टर विमल छाजेड़ के मुताबिक हार्ट अटैक के पीछे एक बड़ी वजह हार्ट की आर्टरी की अंदरूनी झिल्ली (एंडो थीलियम) का कमजोर होना है। अगर यह झिल्ली मजबूत और लचीली हो तो ज्यादा ब्लॉकेज के बावजूद ये फटती नहीं है। लेकिन जब इसकी स्ट्रेंथ और फ्लेक्सिबिलिटी कम हो जाती है तो कम ब्लॉकेज पर भी ये फट सकती है। झिल्ली के फटते ही खून जमने लगता है और अचानक 100 प्रतिशत ब्लॉकेज बन जाती है, जिससे हार्ट अटैक हो जाता है।

हार्ट अटैक के लिए 5 बड़े कारण

  1. आज के युवाओं में करियर और प्रतिस्पर्धा का तनाव कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ा देता है। ये हार्मोन नसों में सूजन (Inflammation) पैदा करता है, जो हार्ट अटैक का मुख्य कारण बनता है। Harvard Medical School 2025 की रिसर्च के मुताबिक क्रोनिक स्ट्रेस शरीर में एड्रेनालिन और कोर्टिसोल का स्तर हमेशा हाई रखता है। ये दिल की मांसपेशियों को बिजली के झटके जैसा इलेक्ट्रिकल शॉक देता है, जिससे दिल की धड़कन अचानक रुक जाती है
  2. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और प्रदूषण की वजह से धमनियों में सूजन रहती है। डॉक्टर इसे सॉफ्ट प्लाक कहते हैं, जो अचानक फटकर ब्लॉकेज पैदा कर देता है।
  3. 6 घंटे से कम की नींद सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को प्रभावित करती है। रात में देर तक जागना दिल की मांसपेशियों को रिकवर होने का समय नहीं देता। European Society of Cardiology के वैज्ञानिकों के मुताबिक जो लोग वर्किंग डेज में कम सोते हैं और वीकेंड पर ज्यादा सोते हैं उन्हें सोशल जेट लैग होता है। इससे दिल की लय बिगड़ जाती है और इन्फ्लेमेशन बढ़ता है, जो लंबे समय में हार्ट अटैक का कारण बनता है।
  4. स्टेरॉयड और सप्लीमेंट्स का गलत इस्तेमाल हार्ट अटैक आने की वजह साबित होता है।
  5. लगातार 8-9 घंटे बैठकर काम करना स्मोकिंग जितना ही खतरनाक है। यह शरीर के गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को कम करता है और खून को गाढ़ा बनाता है।

किन युवाओं को ज्यादा खतरा

डॉक्टरों के अनुसार जिन युवाओं को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड,मोटापा, स्मोकिंग की आदत है और लगातार तनाव में रहते हैं तो उन्हें हार्ट अटैक का ज्यादा खतरा है।

हार्ट अटैक से कैसे करें बचाव

युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को देखते हुए नियमित एक्सरसाइज बेहद जरूरी मानी जा रही है। एक्सरसाइज से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम होता है और अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ता है। रोजाना 30–45 मिनट वॉक, योग, साइकलिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दिल की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। इससे ब्लॉकेज बनने की रफ्तार धीमी होती है और हार्ट अटैक का खतरा कम होता है।

संतुलित और कम फैट वाला भोजन लें

एक्सपर्ट्स के मुताबिक आज की खराब डाइट युवाओं में हार्ट डिजीज की बड़ी वजह बन चुकी है। ज्यादा तला-भुना, प्रोसेस्ड और जंक फूड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाता है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज तेजी से बनती है। संतुलित आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और हेल्दी फैट शामिल करें। कम तेल और कम नमक वाला भोजन दिल को लंबे समय तक हेल्दी रखने में मदद करता है।

स्ट्रेस कंट्रोल करें

लगातार तनाव में रहना दिल की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। तनाव के कारण शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता हैं, जो ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को लगातार ऊंचा रखता हैं। इससे हार्ट की आर्टरी पर दबाव बढ़ता है और ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। तनाव को कंट्रोल करने के लिए मेडिटेशन, योग, पर्याप्त नींद और वर्क-लाइफ बैलेंस स्ट्रेस को कंट्रोल करने में मदद करते हैं और हार्ट अटैक के खतरे को कम करते हैं।

जांच और CT एंजियोग्राफी है जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि युवाओं को समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच जरूर करानी चाहिए। जिन लोगों में मोटापा, स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई BP या फैमिली हिस्ट्री जैसे रिस्क फैक्टर्स हैं, उनके लिए जांच और भी जरूरी हो जाती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह पर CT एंजियोग्राफी जैसे टेस्ट कराए जा सकते हैं, ताकि हार्ट की ब्लॉकेज का समय रहते पता चल सके।

निष्कर्ष

युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक इस बात का संकेत हैं कि हार्ट डिजीज की प्रकृति बदल रही है। समय पर जांच और लाइफस्टाइल में सुधार ही इसका सबसे प्रभावी उपाय है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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