आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रोसेस्ड फूड की आदतों ने हमें गंभीर बीमारियों के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इनमें से सबसे खतरनाक है कोलन कैंसर, जो अक्सर खराब पाचन और आंतों की अनदेखी के कारण पनपता है। कोलन कैंसर बड़ी आंत (Colon) में होने वाला कैंसर है, जो आमतौर पर आंत की अंदरूनी परत से शुरू होता है। यह अक्सर छोटे पॉलिप्स से विकसित होता है, जो समय के साथ कैंसर में बदल सकते हैं। अनहेल्दी डाइट, कम फाइबर का सेवन, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, मोटापा, धूम्रपान, शराब, शारीरिक गतिविधि की कमी और जेनेटिक कारण इसके मुख्य कारण हैं। इसके लक्षणों में लंबे समय तक कब्ज या दस्त, मल में खून, पेट दर्द, गैस, अचानक वजन कम होना, कमजोरी और थकान शामिल हैं। शुरुआती स्टेज में लक्षण नहीं दिखते इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।
हमारे किचन में कुछ चीजें ऐसी हैं जो हम बड़ी आंत के इस कैंसर से बचाने में असरदार साबित होते हैं। गैस्ट्रो लीवर हॉस्पिटल, स्वरूप नगर, कानपुर में सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, डॉ. वी. के. मिश्रा (Dr. V.K. Mishra)के मुताबिक कुछ फूड आंतों की सुरक्षा परत (Protective layer) को मजबूत कर कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोक सकते हैं। देश के जाने-माने गैस्ट्रोलॉजिस्ट का कहना है कि अगर आप अपनी डेली डाइट में सिर्फ 5 खास बदलाव कर लें, तो न केवल आपका पाचन तंत्र फौलाद जैसा बनेगा, बल्कि कोलन कैंसर का खतरा भी कोसों दूर रहेगा। आइए जानते हैं क्या हैं वे 5 सुपरफूड्स और उन्हें खाने का सही तरीका।
होल ग्रेन्स (Whole Grains)
होल ग्रेन्स जैसे ओट्स, ब्राउन राइस, जौ (Barley) और होल व्हीट डाइटरी फाइबर के बेहतरीन स्रोत हैं। फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और मल त्याग को नियमित बनाए रखता है, जिससे आंतों में मौजूद हानिकारक तत्व जल्दी बाहर निकल जाते हैं। इससे कार्सिनोजेन्स का कोलन की दीवार से संपर्क कम होता है। रिसर्च बताती है कि फाइबर से भरपूर डाइट कोलन कैंसर के जोखिम को काफी हद तक घटाती है।
क्रूसिफेरस सब्ज़ियां (Cruciferous Vegetables)
ब्रोकली, पत्ता गोभी, फूलगोभी, केल और ब्रसेल्स स्प्राउट्स को क्रूसिफेरस सब्ज़ियां कहा जाता है। इनमें ग्लूकोसिनोलेट्स नामक कंपाउंड होते हैं, जो पकने पर सल्फोराफेन और इंडोल्स में बदल जाते हैं। ये तत्व शरीर में डिटॉक्स एंजाइम को सक्रिय करते हैं और सूजन से जुड़ी कैंसर प्रक्रिया को रोकते हैं। ये असामान्य कोशिकाओं को नष्ट करने में भी मदद करते हैं।
दालें और बींस (Legumes & Beans)
दालें, चना, राजमा, काले चने और सोयाबीन न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स और जरूरी विटामिन्स पाए जाते हैं। आंतों में इनके फर्मेंटेशन से शॉर्ट चेन फैटी एसिड्स बनते हैं, जो कोलन की कोशिकाओं को पोषण देते हैं और ट्यूमर बनने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं। साथ ही ये सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को भी कम करते हैं।
कैल्शियम युक्त डेयरी प्रोडक्ट्स (Calcium Rich Dairy Foods)
दूध, दही और चीज़ जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। कैल्शियम आंतों में मौजूद बाइल साल्ट और फैटी एसिड्स को बांधकर उनके हानिकारक प्रभाव को कम करता है। इससे कोलन की लाइनिंग सुरक्षित रहती है। खासतौर पर दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं, जिससे कोलन हेल्थ बेहतर होती है और कैंसर का खतरा घटता है।
फैटी फिश और ओमेगा-3 फैटी एसिड (Fatty Fish & Omega-3)
सैल्मन, मैकेरल, सार्डिन और एंकोवी जैसी फैटी फिश ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती हैं। ओमेगा-3 एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व है, जो क्रॉनिक सूजन को कम करता है। लगातार बनी रहने वाली सूजन कोलन कैंसर का बड़ा कारण मानी जाती है। ओमेगा-3 असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि को रोककर और सेल डेथ को बढ़ावा देकर कोलन को सुरक्षा देता है।
डिस्क्लेमर
यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
ये पत्तियां बॉडी में कूट-कूट कर भर देंगी ताकत, B12 से भरपूर लीव्स से हड्डियां बनेंगी फौलाद, हंसाजी योगेंद्र से जानें फायदे। इन पत्तियों की पूरी जानकारी लेने के लिए लिंक पर क्लिक करें।
