केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि जीएसटी लागू हो जाने के कारण लोगों को अब डायलिसिस, पेसमेकर लगाने, आर्थोपेडिक्स में सहायक उपकरणों और कैंसर उपचार के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है। मंत्रालय के जीएसटी प्रकोष्ठ ने माल और सेवा कर के स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को लेकर पूछे जाने वाले एक सवाल के जवाब में अपनी वेबसाइट पर यह जानकारी दी है।एक अन्य प्रश्न के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि हालांकि जीएसटी के तहत जीवनरक्षक दवाइयां, स्वास्थ्य सेवाएं और स्वास्थ्य उपकरण कर मुक्त बने रहेंगे। जीएसटी के चलते किन-किन स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतें बढ़ने की संभावना है, इस संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि डायलिसिस (5 से 12 फीसद), पेसमेकर (5.5 से लेकर 12-18 फीसद), आॅर्थोपेडिक्स में सहायक उपकरण (5 से 12 फीसद) और ब्लड कैंसर छोड़कर कैंसर के लिए सभी सहायक उपकरण (5 से लेकर 7-12 फीसद) ऐसी सेवाएं हैं, जिनके कर में जीएसटी के कारण इजाफा होगा।
सूत्रों के मुताबिक हेपेटाइटिस की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण एवं रेडियोलॉजी मशीनों को छोड़कर, डायग्नोस्टिक किट सर्वोच्च 28 फीसद कर के दायरे में आ जाएंगे। इस वजह से इनका उपचार अधिक खर्चीला हो जाएगा। जहां तक स्वास्थ्य पर्यटन का सवाल है, जीएसटी के लागू हो जाने से बीमा, फार्मास्युटिकल और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की लागत में गिरावट आने की संभावना है। इससे देश में स्वास्थ्य पर्यटन के लिए बेहतर संभावनाएं होंगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जीएसटी के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। यह सभी हितधारकों तक सूचना पहुंचाने और उनकी चिंताओं के समाधान के लिए काम कर रहा है।

