Coronavirus and Stress: दुनिया भर में कोरोना वायरस तेजी से पैर पसार रहा है। भारत में भी पॉजिटिव केसेज की संख्य़ा लगातार बढ़ती जा रही है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन भी घोषित किया गया है। हालांकि इसकी वजह से एक दूसरी समस्या देखने को मिल रही है, वो है अवसाद। सोशल आइसोलेशन और दूसरी वजहों के चलते इन दिनों तमाम लोग तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रहे हैं। हालांकि, तनाव हमारी सेहत व शरीर के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है, ऐसे में आइए जानते हैं इससे बचने के उपाय…

खुद को समझिये: साइकोलॉजिस्ट काव्या भारद्वाज खुद को पढ़ने और समझने की प्रक्रिया पर जोर देते हुए कहती हैं कि खुद को स्वतंत्र व तनाव मुक्त बनाने में आप खुद ही खुद की मदद कर सकते हैं। इस लॉकडाउन को नकारात्मक लेने के बजाय आप खुद को पर्याप्त समय देने की कोशिश करें। खुद पर काम करने के लिए ये लॉकडाउन एक बेहतरीन समय साबित हो सकता है। जहां आप घर पर रहकर अपना ‘मी टाइम’ एंजॉय कर सकते हैं, वहीं घर पर रहने से आप में कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा भी कम रहता है।

सामाजिक दूरी को न लें अन्यथा: कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि आप अपनी परेशानियों के बारे में किसी को बता नहीं सकते। काव्या भारद्वाज मुताबिक कभी-कभी किसी परेशानी से निकलने का एकमात्र तरीका उसके बारे में बात करना ही होता है। किसी भी चीज को नकारने से वास्तविकता बदलती नहीं है। ऐसे में, जरूरी है कि आप अगर कोरोना काल में मानसिक रूप से सामान्य महसूस नहीं कर रहे हैं तो अंदर ही अंदर घुटने के बजाय अपनों से बात करें।

बच्चों और बुजुर्गों का ऐसे रखें ख्याल: लॉकडाउन के दौरान सबसे अधिक दिक्कत बच्चों और बुजुर्गों के साथ हो रही है क्योंकि बच्चों को घर में कैद रखना आसान नहीं है। वहीं, बुजुर्ग किसी भी चीज को लेकर जल्दी घबरा जाते हैं। समय व्यतीत करने के लिए बच्चों को अपना कोई मनपसंद कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे बच्चों की प्रोडक्टिविटी भी बेहतर होगी।

आप चाहें तो उन्हें अपनी पसंद की कोई किताब पढ़ने दें या फिर बच्चों को चित्रकारी, डांस, गाना गाने के लिए भी कह सकते हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बुजुर्गों का भी इस दौरान खास ख्याल रखने की जरूरत है। उन्हें ऐसे वक्त में अकेला न छोड़ें और न ही उनकी दिनचर्या में कोई बदलाव आने दें। बाहर निकलने पर मनाही जरूर है लेकिन आप घर के बुजुर्गों को घर की बालकनी या खिड़की के पास आने के लिए कहें।