Food Poisoning in Children: बच्चों की सेहत का ध्यान रखना आसान नहीं होता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा मजबूत नहीं होती है। ठीक उसी प्रकार बड़ों की तुलना में बच्चों को पाचन तंत्र भी कमजोर होता है। ऐसे में जो चीजें बड़े आसानी से पचा लेते हैं, जरूरी नहीं है कि बच्चे भी उस खाद्य पदार्थ को डाइजेस्ट कर पाएं। यही कारण है कि बच्चों में पेट संबंधी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। पेट में दर्द, दस्त या उल्टी आना आमतौर पर इसी वजह से होता है। पर कई बार इसका कारण फूड पॉइजनिंग भी हो सकता है। बदलते में मौसम में खाने में मौजूद बैक्टीरिया या अन्य टॉक्सिक पदार्थ बच्चों को फूड पॉइजनिंग का शिकार बना सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं इसके लक्षण और कैसे करें बचाव-
बच्चों में फूड पॉइजनिंग के लक्षण: आमतौर पर कुछ अटपटा का लेने के बाद अगर पेट खराब या दस्त होने लगे तो ये फूड पॉइजन का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, लगातार पेट में दर्द या फिर गैस की अत्यधिक परेशानी भी इसका एक लक्षण है। वहीं, गंभीर स्थिति में बच्चों के मल में खून आने की शिकायत भी हो सकती है। इसके अलावा, बुखार या सिर दर्द होना भी फूड पॉइजनिंग का लक्षण हो सकता है। वहीं, फूड पॉइजनिंग होने पर बच्चों को कुछ भी खाने पर उल्टी भी हो सकती है।
ये हैं घरेलू उपाय: बच्चों में ये परेशानी होने पर बार-बार उल्टी व दस्त होने लगता है जिसके कारण डिहाइड्रेशन की समस्या आ सकती है। इसलिए कुछ-कुछ देर के अंतराल पर नमक, चीनी और पानी का घोल बच्चों को पिलाते रहना चाहिए। इसके अलावा, 1 साल से बड़े बच्चों को आधे चम्मच शहद में 2 बूंद अदरक का रस मिलाकर पिलाने से भी आराम मिलेगा। वहीं, दस्त को रोकने में केला भी कारगर है। केले में पोटैशियम भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जिसमें एलेक्ट्रोलाइट पाया जाता है। ये तत्व शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार होते हैं। फूड पॉइजनिंग होने पर सेब का सेवन भी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसे खाने से बच्चों में हार्ट्बर्न और एसिड रिफ्लक्स की परेशानी कम होती है।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी: हालांकि, फूड पॉइजनिंग की गंभीर स्थितियों में बच्चों को डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी हो जाता है। अगर शिशु को लगातार दस्त हो रहे हैं या फिर वोमिटिंग रुक नहीं रही तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। इस कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन होने का खतरा रहता है जो घातक भी सिद्ध हो सकता है। कई बार इन परिस्थितियों में चिकित्सक ग्लूकोज चढ़ाने की सलाह भी देते हैं जिससे बच्चों के शरीर में पानी और ऊर्जा की मात्रा बढ़ाई जा सके।

