Uric Acid Home Remedies: यूरिक एसिड हमारे शरीर में मौजूद प्यूरीन नाम के प्रोटीन के ब्रेकडाउन से बनता है। आमतौर यह एसिड खून के जरिए किडनी तक पहुंचता है और यूरिन के मार्ग से बाहर निकल जाता है। लेकिन जब शरीर में इस एसिड की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो किडनी सुचारू रूप से टॉक्सिक पदार्थों को फिल्टर करने में सक्षम नहीं रह जाती। इसके कारण यूरिक एसिड शरीर के जोड़ों में क्रिस्टल के फॉर्म में जमा हो जाते हैं। सामान्य तौर पर यूरिक एसिड की रीडिंग 3.5 से 7.2 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर होती है। इससे ज्यादा रीडिंग होने पर आपको हाई यूरिक एसिड की समस्या हो सकती है।
ज्यादा प्रोटीन खाना हानिकारक: जॉइंट्स में क्रिस्टल फॉर्म होने के कारण लोगों को गठिया रोग, जोड़ों में दर्द, गाउट और सूजन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आज के समय में लोग फिटनेस के प्रति इतने सजग हो गए हैं कि कार्ब्स व फैट का सेवन तो नाम मात्र ही करते हैं। ऐसे में डाइट में ये लोग प्रोटीन को ज्यादा शामिल करते हैं। शरीर में प्रोटीन की अधिकता से यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि कितना प्रोटीन आपके लिए सेहतमंद है ये जानकर ही इसका सेवन करें। प्रोटीन वाले कई 100 ग्राम खाद्य पदार्थों में 200 मिली ग्राम प्यूरीन होता है।
केक-पेस्ट्री से बनाएं दूरी: केक-पेस्ट्री खाने से शरीर मे यूरिक एसिड का स्तर हाई हो सकता है। ऐसे में जिन लोगों को जोड़ों में दर्द, पैर की उंगलियों में सूजन और उठने-बैठने में परेशानी का सामना करना पड़ता है, उन्हें इन खाद्य पदार्थों से दूरी बना लेनी चाहिए। एक शोध जिसमें करीब 1 लाख 25 हजार लोग शामिल हुए थे, उसके रिजल्ट के अनुसार जिन लोगों के खाने में Fructose की मात्रा अधिक देखी गई उनमें गाउट जैसी बीमारी से ग्रस्त होने का खतरा दूसरों की तुलना में 62 प्रतिशत अधिक था। हालांकि इनमें अधिक प्यूरीन और फ्रुक्टोज नहीं होते, लेकिन इनमें पोषक तत्व बहुत कम होते हैं और ये यूरिक एसिड को बढ़ा सकते हैं।इन फूड आइटम्स के अलावा भी मरीजों को अधिक मीठा खाने से परहेज करना चाहिए।
मांस-मदिरा: शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रण में रखने के लिए जरूरी है कि लोग सालमन और ट्यूना जैसी समुद्री मछलियों के सेवन से बचें। सी-फूड में प्यूरीन की मात्रा अधिक पायी जाती है जो हाई यूरिक एसिड के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। इसके अधिक सेवन से मरीजों को दिल व किडनी की बीमारी की चपेट में आने का खतरा होता है। इसके अलावा, चिकेन व मटन में भी कलेजी व गुर्दा खाने से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा में वृद्धि देखने को मिल सकती है। वहीं, शराब का सेवन भी हाई यूरिक एसिड के मरीजों के लिए घातक हो सकता है।

