Thyroid in Children: पहले थायरॉयड को बढ़ती उम्र में होने वाली बीमारियों में गिना जाता था लेकिन अब युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। खराब जीवन-शैली और अनहेल्दी खानपान के कारण थायरॉयड बीमारी आज के समय में बहुत ही आम बन चुकी है। हालांकि, कई लोग ऐसा सोचते हैं कि ये बीमारी केवल महिलाओं को अपने चपेट में लेती है या फिर बढ़ती उम्र के साथ लोग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं। लेकिन कई बार थायरॉयड की बीमारी छोटे बच्चों में देखने को मिल जाती है। थायरॉयड के लक्षणों को पहचानना आसान नहीं है, खासकर कि छोटे बच्चों में। ऐसे में आइए जानते हैं बच्चों में कैसे करें इस बीमारी की पहचान और क्या हैं बचाव के तरीके-

बच्चों में इतने प्रकार के थायरॉयड का खतरा: बच्चों और किशोरों में हाशीमोटोज थायरॉयडिटिस की समस्या सबसे अधिक देखने को मिलती है। इसे ऑटो-इम्यून बीमारी भी कहा जाता है। 4 साल से बड़े बच्चे इसका शिकार हो सकते हैं। इस बीमारी में थायरॉयड ग्लैंड अंडर एक्टिव हो जाता है और बच्चों में ब्रेन की ग्रोथ भी कम होती है। वहीं, कुछ बच्चों में थायरॉयड की समस्या जन्मजात होती है। शिशु के शरीर में जब थायरॉयड ग्लैंड ठीक तरह से डेवेलप नहीं हो पाता है, तब ऐसी समस्या उत्पन्न होती है। इसके अलावा, ग्रेव्स बीमारी भी बच्चों और किशोरों को अपनी चपेट में ले सकती है। इसमें ग्लैंड का आकार बढ़ जाता है जिससे शरीर में थायरॉक्सिन हार्मोन अधिक मात्रा में प्रोड्यूस होने लगता है।

क्या हैं लक्षण: बड़े बच्चों और किशोरों में वजन का बढ़ना, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, मासिक धर्म में अनियमितता, कब्ज, थकान, आवाज का कर्कश होना, बाल झड़ना, शारीरिक व मानसिक विकास में धीमापन, कम वजन, ज्यादा गर्मी लगना और आंखों में सूजन थायरॉयड के लक्षण हो सकते हैं। वहीं, छोटे बच्चों में ड्राय स्किन, कम एनर्जी, देर से दांत निकलना, चिड़चिड़ापन, कब्ज, इनएक्टिवनेस, ज्यादा रोना और ठीक से वजन नहीं बढ़ना इस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।

कैसे करें बचाव: बच्चों में थायरॉयड के लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से जरूर सलाह लें। थायरॉयड बीमारी बच्चों के शारीरिक व मस्तिष्क के विकास में बाधा डालती है, ऐसे में जरूरी है कि इनका खास ख्याल रखा जाए। डॉक्टर द्वारा सुझाए गए दवाइयों को समय पर देने के अलावा, बच्चों के खाने-पीने पर भी ध्यान देना आवश्यक है। ये सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे के खाने में सभी जरूरी पोषक तत्व मौजूद हों। वहीं, जन्मजात थायरॉयड की बीमारी की पहचान के लिए ये जरूरी है कि हर बच्चे का जन्म के कुछ दिनों के अंदर ही टीएसएच (Thyroid Stimulating Hormone) जांच कराई जाए। साथ ही साथ, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को भी अपना खास ध्यान रखना चाहिए ताकि शिशु किसी भी बीमारी के चपेट में न आएं।