यूरिक एसिड एक प्राकृतिक रसायन है जो प्यूरीन के टूटने से बनता है। प्यूरीन कुछ फूड्स जैसे रेड मीट, समुद्री भोजन, बीयर और शरीर में बनने वाले प्राकृतिक पदार्थों से मिलता है। सामान्य स्थिति में किडनी यूरिक एसिड को फिल्टर कर बाहर निकाल देती है, लेकिन जब प्यूरीन अधिक हो जाए या किडनी की क्षमता कम हो जाए, तो यूरिक एसिड खून में बढ़ने लगता है। यह स्थिति हाइपरयूरिसीमिया कहलाती है और आगे चलकर गाउट, जोड़ों में सूजन और किडनी स्टोन जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है। यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए डेली डाइट में बदलाव करना बेहद जरूरी है। डाइट में प्यूरीन रिच फूड्स से परहेज करें, पानी का ज्यादा सेवन करें और डाइट का ध्यान रखें। 

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा (BAMS, Ayurvedic Physician) के अनुसार, बथुआ (Chenopodium album) सर्दियों का एक ऐसा हरा साग है जिसमें प्राकृतिक डिटॉक्स गुण पाए जाते हैं। यह शरीर से जमा यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है और जोड़ों में बनने वाले क्रिस्टल को घुलाने में मदद करता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि बथुआ कैसे यूरिक एसिड के स्तर को कंट्रोल करता है। 

बथुआ कैसे यूरिक एसिड को कंट्रोल करता है?

बथुआ में खूब फाइबर होता है, जिससे पाचन बेहतर होता है और शरीर में जमा अपशिष्ट पदार्थ तेजी से बाहर निकलते हैं। इससे यूरिक एसिड का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। ये साग प्राकृतिक डाइयूरेटिक है जो किडनी के टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है। बथुआ के मूत्रवर्धक गुण पेशाब का उत्पादन बढ़ते है और किडनी यूरिक एसिड व अन्य टॉक्सिन आसानी से बाहर निकाले में कामयाब रहती है। 

पोटैशियम और आयरन से भरपूर बथुआ किडनी फंक्शन में सुधार करता है। इस साग में मौजूद पोटैशियम किडनी के कामकाज को सपोर्ट करता है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखकर यूरिक एसिड जमा होने से रोकता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं जो गाउट और जोड़ों की सूजन में राहत देते हैं। बथुआ में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते हैं जो जोड़ों की सूजन, जलन और दर्द को कम करते हैं। गाउट के मरीजों के लिए यह साग नेचुरल तरीके से राहत देता है।

कैसे करें सेवन?

 स्टीम करके पोटली बनाएं

जोड़ों में दर्द या सूजन होने पर बथुए के पत्तों को स्टीम कर पोटली बनाएं और दर्द और सूजन वाली जगह पर बांधे जिससे सूजन और दर्द कम होगा।

उबालकर खाएं

बथुआ को उबालकर साग के रूप में, सूप या कढ़ी में शामिल करके खाया जा सकता है। इस तरह बथुआ का सेवन सूजन और दर्द को कंट्रोल करता है। 

आटे में मिलाकर रोटी बनाएं

बथुए को हल्का उबालकर आटे में मिलाएं और बथुआ रोटी बनाएं। यह रोज़ाना खाने का आसान तरीका है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • बथुआ में ऑक्सलेट होता है, जो किडनी स्टोन को बढ़ा सकता है। इसलिए सीमित मात्रा में ही सेवन करें।
  • अगर पहले से किडनी से जुड़ी बीमारी है तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका सेवन करें।
  • गर्भवती महिलाओं को अधिक मात्रा में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

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