गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति शरीर की ताकत कम होना, यानी एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) आज पूरी मानव जाति के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। उन्होंने इसे एक “साइलेंट डिजास्टर” यानी चुपचाप फैलने वाली आपदा बताया।

अमित शाह ने समझाया कि AMR का मतलब है कि एंटीबायोटिक दवाएं अब पहले की तरह बैक्टीरिया पर असर नहीं करतीं। इसकी तीन मुख्य वजहें हैं। पहली वजह है अधूरा इलाज, जब लोग एंटीबायोटिक का कोर्स शुरू करके बीच में ही छोड़ देते हैं, तो बीमारी पूरी तरह खत्म नहीं होती और बैक्टीरिया और मजबूत हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि दूसरी वजह है जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, जब कई बार बीमारी के हल्के लक्षणों पर ही डॉक्टर एंटीबायोटिक दे देते हैं या लोग खुद ही दवा ले लेते हैं और तीसरी वजह है डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना, जो सबसे खतरनाक है।

‘AMR का असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ सकता है’

उन्होंने कहा कि अगर शरीर की एंटीबायोटिक से ठीक होने की क्षमता खत्म हो गई, तो भविष्य में सामान्य बीमारियों का इलाज भी मुश्किल हो जाएगा। इससे न केवल व्यक्ति बल्कि पूरा समाज प्रभावित होगा। अमित शाह ने यह भी बताया कि AMR का असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ सकता है। यहां तक कि मां के पेट में पल रहे बच्चे तक यह समस्या पहुंच सकती है।

मित्रों, मैं मानता हूं कि AMR बहुत बड़ा संकट है, और यह केवल इंसान ही नहीं, पूरे समाज के लिए संकट है। अगर मानव शरीर की एंटीबायोटिक से रिपेयर होने की क्षमता को ही हम समाप्त कर देंगे, कुंद कर देंगे, तो बीमारियों को हम रोक नहीं पाएंगे।

  • अमित शाह, गृह मंत्री

अमित शाह ने AMR के खतरे से निपटने के लिए रिसर्च बढ़ाने, लोगों में दवाओं के सही इस्तेमाल की जानकारी देने, मेडिसिन लिटरेसी, रेड लाइट अभियान और आखिरी व्यक्ति तक जागरूकता पहुंचाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य संक्रमण को रोकना और एंटीबायोटिक दवाओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना होना चाहिए।

एंटीबायोटिक दवाएं तेजी से हो रहीं बेअसर: रिपोर्ट

हाल में जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल की 2025 की एक स्टडी रिपोर्ट में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। इस अध्ययन में 9,776 मरीजों के सैंपल की जांच की गई, जिसमें कई खतरनाक बैक्टीरिया पर आम एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर पाई गईं।

रिपोर्ट के अनुसार, सिप्रोफ्लॉक्सासिन दवा 79% क्लेबसिएला, 84% ई.कोलाई, 87% एंटरोकॉकस और 74% स्टैफायलोकोकस ऑरियस संक्रमण में असरदार नहीं रही। ई.कोलाई, जो दस्त, सेप्सिस और आंतों की बीमारियों का कारण बनता है, उस पर एम्पिसिलिन 93% मामलों में बेअसर पाई गई।

मेरोपेनेम और डॉक्सीसाइक्लिन जैसी दवाओं में भी कई बैक्टीरिया के खिलाफ उच्च रेजिस्टेंस देखा गया। बढ़ते खतरे को देखते हुए, राज्य IMA द्वारा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को रोकने के लिए दिसंबर 2025 में एक राज्य स्तरीय समिति बनाई जा रही है। यह समिति डॉक्टरों को जागरूक करेगी और दवाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए काम करेगी।

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